कथाकथन : सूरज प्रकाश : २१जून २००८ (स्लाइड शो) - भारत से

हैदराबाद, २२ जून(प्रेस विज्ञप्ति).

"जब कोई अनुभव रचनाकार को गहराई तक व्यथित करता है या विचलित करता है तो उसकी यह तीव्रता उसे रचना के रूप में अभिव्यक्त करने के लिए विवश करती है। रचनाकार प्रशिक्षण द्बारा नहीं इस रचनात्मक बैचैनी द्बारा ही लिखना सीखता है. रचना के रूप का निर्धारण भी अनुभव के रूप के आधार पर ही होता है. कई बार कुछ अनुभव बड़ी रचना में नहीं आ पाते. परन्तु रचनाकार को तंग करते रहते हैं. ऐसे अनुभवों को लघु कथाओं में अधिक पैनेपन के साथ व्यक्त किया जा सकता है. लेखक विचिलित अनुभवों को ग्रहण और संप्रेषित करता है. वह कोई संदेश दे ऐसा ज़रूरी नहीं है. इतना ही नहीं किसी कहानी को जहाँ लेखक ख़त्म करता है वहाँ से पाठक की कहानी शुरू होती है." ये विचार हैदराबाद में २१ जून, शनिवार को उच्च शिक्षा और शोध संसथान, दक्षिण भारत हिन्दी प्रचार सभा के व्याख्यान कक्षा में आयोजित 'कथा कथन' कार्यक्रम में पुणे से पधारे वरिष्ट कथाकार सूरज प्रकाश ने अपनी कहानियो के वाचन और उन पर चली लम्बी चर्चा के बाद अपना मत प्रकट करते हुए व्यक्त किए. 'कथा कथन' कार्यक्रम की अध्यक्षता उच्च शिक्षा और शोध संस्था के आचार्य एवं अध्यक्ष डॉ. ऋषभ देव शर्मा ने की.

आरम्भ में अनुराधा जैन ने वन्दना प्रस्तुत की तथा चन्द्र मौलेश्वर प्रसाद ने अतिथि कथाकार का परिचय देते हुए बताया कि सूरज प्रकाश के दो उपन्यास, दो कहानी संग्रह और एक व्यंग्य संग्रह के अतिरिक्त अनेक अनुदित ग्रन्थ प्रकाशित हैं।

कथा कथन के अंतर्गत सूरज प्रकाश ने 'महानगर की कथाएं' शीर्षक से पाँच तथा 'दंगा कथाएं' शीर्षक से सात लघु कथाओं का पाठ करने के अलावा टेलीफोन वार्ता के शिल्प में रचित एक पूर्णाकार कहानी 'दो जीवन समांतर' का पाठ किया।

रचना पाठ के उपरांत कार्यक्रम के दूसरे चरण 'लेखक से संवाद' में हैदराबाद के लेखकों, प्राध्यापकों और शोधार्थियों ने पठित कहानियों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करने के साथ साथ लेखक से उनकी रचना प्रक्रिया, प्रयोजनीयता, पक्ष धरता, शिल्प विधान और भाषा के सम्बन्ध में जिज्ञासाएं प्रकट की। जिनका समाधान कथाकार ने उत्साह पूर्वक किया। चर्चा-परिचर्चा में डॉ। मीना आहूजा, डॉ, अहिल्या मिश्र, डॉ. शुभदा वांजपे डॉ. रामजी सिंह उदयन, डॉ. राम कुमार तिवारी, डॉ. किशोरी लाल व्यास, डॉ. बी सत्यनारायण, डॉ. जी नीरजा, डॉ. करण सिंह उटवाल, डॉ. मृत्युंजय सिंह, डॉ. मोहन लाल निगम, भगवान दास जोपट, गोविन्द मिश्रा.अवनीश, लक्ष्मी नारायण अग्रवाल, पवित्रा अग्रवाल, गुरुदावाल अग्रवाल, संजीवनी, भंवर लाल उपाध्याय, श्रीनिवास सोमानी, अभिषेक दाधीच, शिवकुमार राजौरिया, अनुराधा जैन, शक्ति कुमार द्विवेदी, चंद्र मौलेश्वर प्रसाद, द्वारका प्रसाद मायाच तथा कोटा से पधारे शशि प्रकाश चौधरी ने गहन विचार विमर्श किया. डॉ. राधे श्याम शुक्ला और डॉ. एम. वन्कतेश्वर ने चर्चा का समाहार करते हुए कथाकार को शुभकामनाएं दी.कार्यक्रम का संचालन डॉ. बी बालाजी ने किया.

डॉ। ऋषभ देव शर्मा ने अंग वस्त्र प्रदान कर कथाकार सूरज प्रकाश का सम्मान किया तथा नगर के साहित्यकारों की ओर से उन्हें पुस्तके, पत्रिकाएं और लेखनी समर्पित की गई. अतिथि कथाकार ने कृतज्ञता प्रकट करते हुए संयोजकों को अपने उपन्यास 'देस बिराना' की ऑडियो सी डी समर्पित की.

तीन घंटे तक चले कार्याक्रम का समपान चंद्र मौलेश्वरप्रसाद के धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ




1 टिप्पणी:

  1. बढिया समाचार-दर्शन का स्लाइड शो के माध्यम से देने के लिए बधाई। बहुत आकर्षक लगा।

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