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केदार सम्‍मान 2013



केदार सम्‍मान 2013 
‘रोशनी के रास्‍ते पर’ के लिए अनीता वर्मा सम्‍मानित

कविता अपराध बोध से मुक्‍त करती है – नरेश सक्‍सेना



अनीता वर्मा की कविताएँ सकारात्‍मक एवं संवेदनात्‍मक जीवन की माँग रचती कविताएँ हैं जो एक ऐसे आंतरिक विश्‍वास को मुट्ठी में कसकर आगे बढ़ती हैं कि ‘हत्‍यारे समय’ में भी घर और ‘पतझड़ समय’ में हरी संवेदना का अनुरोध बचा रहे। ये कविताएँ समाज की निस्‍तेज सतह के नीचे दबे पड़े अर्धपूर्ण अन्‍तर्विरोधों को उभारती हुई बृहत्‍तर समाज के दु:ख दर्द, निराशाओं उत्‍साहों, आवेगों की सहभागी होती हैं और उम्‍मीद का हाथ पकड़ कर दार्शनिक समयहीनता के वीरान में भटकने से बच जाती हैं। अनीता वर्मा की कविताएँ अभियानों में शामिल होने के आग्रह की कविताएँ हैं। वरिष्‍ठ कथाकार महेश कटारे ने अनीता वर्मा की कविताओं पर यह वक्‍तव्‍य उन्‍हें केदार सम्‍मान 2013 दिए जाने के अवसर पर दिया। 





महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय के इलाहाबाद स्थित क्षेत्रीय केंद्र के सत्‍यप्रकाश मिश्र सभागार में इलाहाबाद के तमाम वरिष्‍ठ साहित्‍यकारों एवं सुधीजनों के बीच वरिष्‍ठ कवि श्री नरेश सक्‍सेना एवं वरिष्‍ठ कथाकार श्री विभूति नारायण राय के द्वारा उन्‍हें प्रशस्ति पत्र, शॉल, स्‍मृति चिन्‍ह और सम्‍मान राशि प्रदान की गई। सम्‍मान समारोह के अध्‍यक्ष श्री नरेश सक्‍सेना ने कहा कि अपने से युवतर कवियों को सम्‍मानित होते देखना बहुत सुखद अनुभव है। अनीता वर्मा की कविताओं में जटिलता नहीं है। उन्‍हें लगातार मनुष्‍यता माँजती रहती है। उनकी कविताएँ अपराधबोध से मुक्‍त करती हैं। सम्‍मान समारोह के मुख्‍य अतिथि श्री विभूति नारायण राय ने कहा कि अनीता वर्मा की कविताएँ मुझे इसलिए प्रिय हैं, क्‍योंकि वे समय और अपने समाज से मुठभेड़ करती हैं। संकट के दौर में उनकी कविताएँ याद आती हैं यही इनकी ताकत है। 


सम्मान प्राप्‍त करने के उपरान्‍त सुश्री अनीता वर्मा ने अपने वक्‍तव्‍य में कहा कि कविता पढ़ने और पढ़ाने के क्रम में मेरा केदारनाथ अगवाल की कविता से गहरा परिचय हुआ। उनकी कविता के सहज मानवीय विंब मुझे प्रभावित करते हैं। जनता के चहेते ऐसे कवि के नाम पर स्‍थापित सम्‍मान को ग्रहण करना मेरे लिए सौभाग्‍य की बात है। उन्‍होंने कहा मेरे लिए कविता जीवन की तरह है, वह हृदय से निकलती हुई एक आवाज है। यह अन्‍तर के स्‍पंदनों के साथ-साथ बाहर की आवाजों की भीतर ले जाकर गुंजाने की एक छोटी- सी कोशिश है। 


केदार शोधपीठ (न्‍यास) बांदा द्वारा आयोजित इस गरिमापूर्ण सम्‍मान समारोह का संचालन डॉ. संजय श्रीवास्‍तव ने किया। अतिथियों का स्‍वागत प्रो. ए.ए. फातमी, श्री असरार गांधी, प्रो. अनीता गोपेश, सुश्री संध्‍या नवोदिता द्वारा किया गया। समारोह के अंत में समस्‍त अतिथियों एवं सुधीजनों का आभार केदार सम्‍मान समारोह के सह संयोजक प्रो. संतोष भदौरिया ने किया।


केदार सम्‍मान समारोह में प्रमुख रूप से जियाउल हक, रामजी राय, ए.ए. फातमी, असरार गांधी, हरीशचन्द्र पाण्डेय, उमेश नारायण शर्मा, असरफ अली बेग, अनीता गोपेश, अनुपम आनन्‍द, के.के. पाण्‍डेय, जयकृष्‍ण राय तुषार, नीलम शंकर, सालेहा जर्रीन, फखरूल करीम, संध्‍या नवोदिता, रामायन राम, सुभाष चन्‍द्र गांगुली, एहतराम इस्‍लाम, रतिनाथ योगेश्‍वर, श्रीरंग पाण्‍डेय, अनिल सिंह, अनिल रंजन भौमिक, आनंद मालवीय, पूर्णिमा मालवीय, सविता सक्‍सेना, निलय उपाध्‍याय, सुधीर सुमन सहित तमाम साहित्‍य प्रेमी उपस्थित रहे।

ध्यातव्य है कि 'केदार सम्मान' व 'केदार शोध पीठ न्यास' के सचिव नरेंद्र पुंडरीक गत दिनों हुए अपनी माताजी के निधन के कारण इस कार्यक्रम में उपस्थित नहीं हो पाए। 
              

वर्ष 2013 के 'कृष्ण प्रताप कथा सम्मान' की घोषणा




वर्ष 2013 का 'कृष्ण प्रताप कथा सम्मान' चर्चित कथा लेखिका उर्मिला शिरीष के कथा संग्रह "कुर्की और अन्य कहानियाँ' को प्रदान किया जाएगा।
 निर्णायकों द्वारा प्रशस्ति में कहा गया है कि -


" स्त्री के अधिकार की बात हो या स्त्री के मन के पुरुष की चाहत की बात हो , किसान की दीन दशा की बात हो या कि उसके शोषण की, आदमी की दृष्टिहीनता की बात हो, या उसके अपढ़ होने के नाते भ्रमित होने की बात हो, या समय व समाज की अराजक स्थिति हो, उर्मिला शिरीष की चेतन दृष्टि हर कहीं कुछ न कुछ बुनती दिखाई देती है। इनकी कहानी का पाठक इनकी भाषा और कथ्य से बंधा इनके इर्द गिर्द घूमता दिखाई देता है। अपने समय का दर्पण बनती ये कहानियाँ बदलाव की थोथी आकांक्षा-भर नहीं रखती हैं, बल्कि उसके लिए उत्तेजना भी जगाती हैं।"






निर्णायक  - सुश्री ममता कालिया, श्री विभूति नारायण राय, श्री दिनेश कुमार शुक्ल
संयोजक - नरेंद्र पुण्डरीक (सचिव केदार शोध पीठ, बाँदा), संतोष भदौरिया 


वर्ष 2013 के प्रतिष्ठित 'केदार सम्मान' की घोषणा

 वर्ष 2013 के प्रतिष्ठित 'केदार सम्मान' की घोषणा 


वर्ष 2013 का प्रतिष्ठित 'केदार सम्मान' समकालीन हिन्दी कविता की चर्चित कवयित्री अनीता वर्मा को उनके कविता संकलन 'रोशनी के रास्ते पर' (2008, राजकमल प्रकाशन) के लिए प्रदान करने की घोषणा केदार शोध पीठ, बाँदा द्वारा की जाती है।

निर्णय की प्रशस्ति में कहा गया है कि - 

"अनीता वर्मा की कविता में हमारे समय की तमाम असंगतियों और त्रासदियों के बीच साधारण मनुष्य के अस्तित्व का एक अन्तरंग साक्षात्कार और उसकी मूल गरिमा को बचाए रखने की कशमकश बहुत प्रभावशाली ढंग से उभरी है। नारी मन के कोमल राग , उसके स्वप्न संसार और उसकी जीवन इच्छा को वे परिवेश की तमाम विडम्बनाओं, विवशताओं व विरोधाभासों के बीच बहुत कुशलता से रेखांकित करती हैं । एक अभिनव कल्पना शक्ति से उनकी काव्य उजास को बहुत ही विलक्षण ढंग से सँजोया है । यह कविता संकलन समकालीन हिन्दी कविता के परिदृश्य में अपनी एक विशिष्ट उपस्थिति दर्ज कराता है। "

यह सारे काव्य वैशिष्ट्य केदार नाथ अग्रवाल के निकट ठहराते हैं।

इस चर्चित एवं महत्वपूर्ण सम्मान के निर्णायकों में प्रो. मैनेजर पाण्डेय, श्री विभूति नारायण राय, श्री राजेश जोशी, श्री विजय कुमार एवं श्री भारत भारद्वाज हैं। इस से पूर्व 'केदार सम्मान' से 17 समकालीन हिन्दी कविता के कवियों को सम्मानित किया जा चुका है।

 - नरेन्द्र पुण्डरीक
(संयोजक) 
- संतोष भदौरिया 
(सह संयोजक)
- डॉ. कविता वाचक्नवी
(सदस्य : कार्यकारिणी )




हिन्दी दिवस से पहले हिन्दी के लिए एक विजय





देश का संविधान चीख-२ कर कहता है कि हिन्दी भारत की राजभाषा है और कामकाज हिन्दी में होना चाहिए पर यह बात भारत सरकार के विभिन्न विभागों और मंत्रालयों में बैठे अधिकारी हिन्दी के नाम पर पिछले ६६ वर्षों से खानापूर्ति करते आ रहे हैं और अंग्रेजी का वर्चस्व जस का तस है.


नवी मुंबई में निवासरत एक युवा हिन्दीप्रेमी ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अंतर्गत 'पत्र सूचना कार्यालय' [पसूका] में राजभाषा की घोर उपेक्षा का प्रकरण अपने हाथ लिया, ६ फरवरी २०१३ से निरंतर उन्होंने पत्र सूचना कार्यालय के अधिकारियों को ईमेल भेजना आरम्भ किया, कई अनुसमारक भेजे, पर उत्तर ना आया. राजभाषा अधिनियम के उल्लंघन की शिकायत राजभाषा विभाग को भेजी गई. पर बात आगे नहीं बढ़ी. शिकायत पर राजभाषा विभाग द्वारा कोई कार्यवाही ना होने से हताश होकर अंतिम हथियार के रूप में शिकायतकर्ता 'सूचना का अधिकार अधिनियम' का सहारा लिया और एक आवेदन लगाया और पसूका से राजभाषा के अनुपालन से जुड़े ढेरों प्रश्न पूछ डाले जिन पर पसूका के केन्द्रीय लोक सूचना अधिकारियों को अपनी गलती का भान हुआ और कार्यालय को १९९२ के उस निर्देश का हवाला दिया गया, जिसमें कहा गया है कि जहाँ-२ हिन्दी अंग्रेजी का एकसाथ प्रयोग होगा, वहाँ -२ हिन्दी को अंग्रेजी के ऊपर प्राथमिकता दी जाएगी क्योंकि राजभाषा हिन्दी है ना कि अंग्रेजी. आरटीआई आवेदन के कई प्रश्नों के ठीक-२ उत्तर नहीं दिए, तब आवेदक ने प्रथम अपील लगा दी. 


अपील के उत्तर में पसूका ने स्पष्ट किया कि वे पसूका की वेबसाइट की सभी सेवाओं में हिन्दी को प्राथमिकता देंगे एवं हिन्दी की सम्पूर्ण सामग्री को अंग्रेजी की सामग्री के पहले/ऊपर/आगे प्रकाशित किया जाएगा.


और कल का दिन 'इतिहास' बन गया है. कल से पसूका की वेबसाइट http://pib.nic.in/newsite/mainpage.aspx पर भारत की राजभाषा को उसका उचित स्थान मिल गया, वेबसाइट पर कई सेवाओं जो पहले केवल अंग्रेजी में थी, अब हिन्दी में उपलब्ध हैं. हिन्दी की विज्ञप्तियों को अंग्रेजी से ऊपर कर दिया गया है, सभी टैब द्विभाषी बना दिए गए हैं. पहले हिन्दी में उन्नत खोज का विकल्प नहीं था, उसे आरम्भ कर दिया गया है, इस तरह दस्तावेज, आलेख आदि को अंग्रेजी सामग्री से नीचे प्रकाशित किया जाता था, उसे भी हिन्दी में ऊपर लगा दिया गया है.


शीघ्र ही फोटो का विवरण भी द्विभाषी रूप में उपलब्ध होगा आज तक उसे केवल अंग्रेजी में डाला जा रहा है. पसूका के ट्विटर एवं यू-ट्यूब पर भी नवीन जानकारी द्विभाषी रूप में शुरू की जा रही है.


राष्ट्रपति द्वारा हिन्दी दिवस पर सर्वोत्कृष्ट हिन्दी लेख व लेखक का सम्मान




हिन्दी पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित सर्वोत्कृष्ट लेख हेतु "सूचना प्रौद्योगिकी में नागरी" (लेखक : भारतीय भाषाओं की कम्प्यूटिंग के पितामह श्री ओम विकास जी ) को वर्ष 2012-2013 के पुरस्कार हेतु चुना गया है, इस लेख हेतु हिन्दी दिवस 14 सितंबर को ओम जी को राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किया जाएगा। 


मैं गर्व की इस घड़ी में अपनी ओर से, 'हिन्दी-भारत' की ओर से व 'विश्वम्भरा' की ओर से ओम विकास जी का अभिनंदन करती हूँ व बधाई संप्रेषित करती हूँ।

 विशेष हर्ष की बात यह भी है कि उस लेख को सर्वप्रथम इसी वेबसाईट पर स्वयं मैंने ही प्रकाशित किया था, आज उस कार्य के लिए पुनः मन गौरवान्वित है। लेख को यहाँ क्लिक कर पढ़ा जा सकता है -  





भारतीय उच्चायोग, लन्दन द्वारा “सम्मान-समारोह" संपन्न


भारतीय उच्चायोग, लन्दन द्वारा “सम्मान-समारोह" संपन्न
डॉ.कविता वाचक्नवी को ‘आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी पत्रकारिता सम्मान’ प्रदत्त

लन्दन स्थित भारतीय उच्चायुक्त डॉ जैमिनी भगवती से आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी पत्रकारिता सम्मान प्राप्त करते हुए डॉ. कविता वाचक्नवी.

ब्रिटेन के विभिन्न नगरों से आए लेखक, पत्रकार तथा कला एवं साहित्य क्षेत्र के प्रतिष्ठित अतिथिगण. 


डॉ. कविता वाचक्नवी को प्रदत्त स्मृतिचिह्न और प्रशस्तिपत्र

 डॉ. कविता वाचक्नवी को  स्मृतिचिह्न भेंट करते हुए भारतीय उच्चायुक्त डॉ जैमिनी भगवती. 

 “जॉन गिलक्रिस्ट हिन्दी शिक्षण सम्मान” प्राप्त करते हुए प्रो. महेंद्र किशोर वर्मा

डॉ. कविता वाचक्नवी को प्रदत्त प्रशस्ति-पत्र 

भारतीय उच्चायोग, लंदन द्वारा
“ सम्मान-समारोह"
सम्पन्न

24 मार्च 2013

भारतीय जीवन मूल्यों के वैश्विक प्रचार-प्रसार की संस्था “विश्वम्भरा” की संस्थापक-महासचिव डॉ.कविता वाचक्नवी को विश्व हिन्दी दिवस के उपलक्ष्य में भारतीय उच्चायोग, लंदन द्वारा इण्डिया हाउस में आयोजित समारोह में “आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी पत्रकारिता सम्मान” किया गया। इस अवसर पर भारत के उच्चायुक्त महामहिम डा. जे॰ भगवती ने उन्हें नकद राशि, स्मृति चिह्न, शॉल और प्रशस्ति पत्र प्रदान किए। उन्हें यह सम्मान मुख्यतः इन्टरनेट व प्रिंट मीडिया द्वारा भाषा, साहित्य, संस्कृति व पत्रकारिता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान के लिए दिया गया है.


उल्लेखनीय है कि अमृतसर में जन्मीं कविता वाचक्नवी समाज-भाषा-विज्ञान तथा काव्यसमीक्षा जैसे विषयों में 'दक्षिण भारत हिन्दी प्रचार सभा, हैदराबाद' से एमफिल और पीएचडी अर्जित करने के बाद सपरिवार लन्दन में रह रही हैं. भारतीय उच्चायोग द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि "आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी पत्रकारिता सम्मान" ग्रहण करते हुए डॉ कविता वाचक्नवी ने अपने दादाश्री व पिताश्री का विशेष उल्लेख किया व लाहौर से हिमाचल और पंजाब तक उनके किए कार्यों व बलिदानों को उपस्थितों के साथ बाँटते हुए बताया कि कैसे हिन्दी सत्याग्रह में जेल में रहने से लेकर हिमाचल को हिन्दीभाषी राज्य का दर्जा दिलाने तक के लिए उनके परिवार ने कष्ट सहे। वाचक्नवी ने अपना सम्मान उन्हीं को समर्पित करते हुए कहा कि वे यह सम्मान उनके प्रतिनिधि के रूप में ग्रहण कर रही हैं। उन्होंने राजदूत व उच्चायोग से अनुरोध किया कि ब्रिटेन में भारतीय उच्चायोग की वेबसाईट को द्विभाषी बनाया जाना चाहिए व उसे अंग्रेजी के साथ साथ हिन्दी में भी उपलब्ध होना चाहिए।


विज्ञप्ति के अनुसार इस समारोह में दो अन्य विशिष्ट हिंदी सेवियों तथा एक हिंदी संस्था को भी सम्मान प्रदान किए गए. “जॉन गिलक्रिस्ट हिन्दी शिक्षण सम्मान” से यॉर्क विश्वविद्यालय के विख्यात भाषाविद प्रो. महेंद्र किशोर वर्मा को तथा “डा॰ हरिवंश राय बच्चन हिन्दी साहित्य सम्मान” से बर्मिंघम के हिंदी लेखक डॉ॰ कृष्ण कुमार को सम्मानित किया गया जबकि नाटिङ्घम की संस्था “काव्य रंग” को “फ़्रेडरिक पिनकोट हिन्दी प्रचार सम्मान” प्रदान किया गया.


इस अवसर पर सम्मानितों को बधाई देते हुए सभा को संबोधित अपना वक्तव्य हिन्दी में देते हुए उच्चायुक्त डॉ जैमिनी भगवती ने कहा कि वे स्वयं असमिया भाषी होते हुए दिल्ली में रहने के कारण हिन्दी में व्यवहार करते रहे हैं व उनकी शिक्षा का माध्यम अंग्रेजी रही है। उन्होने ज़ोर देकर कहा कि निजी रूप से वे त्रिभाषा नीति को भारत के लिए श्रेयस्कर समझते हैं। विश्व पटल पर भारत से बाहर के लोगों के लिए अंग्रेजी, समस्त भारतीय कार्यकलापों के लिए हिन्दी व अपनी मातृभाषा अथवा एक प्रांतीय भाषा प्रत्येक भारतीय को अवश्य सीखनी पढ़नी चाहिए। 


“जॉन गिलक्रिस्ट यू.के.हिन्दी शिक्षण सम्मान” स्वीकार करते हुए प्रो. महेंद्र किशोर वर्मा ने अपने वक्तव्य में यॉर्क विश्वविद्यालय में सर्वप्रथम हिन्दी अध्यापन प्रारम्भ होने सम्बन्धी अपने संस्मरण सुनाए और यूके में हिन्दी अध्यापन से जुड़ी स्थितियों का उल्लेख करते हुए 35 वर्ष के अध्यापन का उल्लेख किया। इसी प्रकार "डॉ. हरिवंश राय बच्चन हिंदी साहित्य सम्मान" ग्रहण करते हुए डॉ. कृष्ण कुमार ने भारत में संस्कृत, हिंदी और दूसरी क्षेत्रीय भाषाओं को बढ़ावा देने के लिए भावपूर्ण अपील करते हुए चेतावनी दी कि ऐसा नहीं करने पर आने वाले दिनों में भारत को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।


समारोह में “डॉ. लक्ष्मीमल सिंघवी प्रकाशन अनुदान योजना” के अंतर्गत श्रीमती उषा वर्मा को उनकी पुस्तक 'सिम कार्ड तथा अन्य कहानियाँ’ और डा॰ कृष्ण कन्हैया को उनके काव्य संग्रह 'किताब जिंदगी की’ के प्रकाशन हेतु नकद राशि और मानपत्र दिया गया।


लंदन स्थित इंडिया हाउस में हुए इस पुरस्कार समारोह में उप उच्चायुक्त डॉ. वीरेंद्र पाल और उच्चायोग में मंत्री (समन्वय) एसएस सिद्धू भी उपस्थित थे। सिद्धू जी ने अपना स्वागत वक्तव्य हिन्दी में दिया व धन्यवाद वक्तव्य भी डॉ वीरेंद्र पॉल द्वारा हिन्दी में ही दिया गया। कार्यक्रम का संचालन उच्चायोग के हिन्दी व संस्कृति अताशे श्री बिनोद कुमार ने सफलतापूर्वक किया। ब्रिटेन के विभिन्न नगरों से आए लेखक, पत्रकार तथा कला एवं साहित्य क्षेत्र के भारतीय मूल के लोग बड़ी संख्या में समारोह में उपस्थित थे ।

चित्र परिचय –

1. लन्दन स्थित भारतीय उच्चायुक्त डॉ जैमिनी भगवती से आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी पत्रकारिता सम्मान प्राप्त करते हुए डॉ. कविता वाचक्नवी.

2. ब्रिटेन के विभिन्न नगरों से आए लेखक, पत्रकार तथा कला एवं साहित्य क्षेत्र के प्रतिष्ठित अतिथिगण.

3. डॉ. कविता वाचक्नवी को प्रशस्तिपत्र और स्मृतिचिह्न भेंट करते हुए भारतीय उच्चायुक्त डॉ जैमिनी भगवती.

4. “जॉन गिलक्रिस्ट हिन्दी शिक्षण सम्मान” प्राप्त करते हुए प्रो. महेंद्र किशोर वर्मा.


[प्रेषक – डॉ. ऋषभदेव शर्मा (संवीक्षक – ‘विश्वम्भरा’), प्रोफ़ेसर एवं अध्यक्ष, उच्च शिक्षा और शोध संस्थान, दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा, खैरताबाद, हैदराबाद-500004; मोबाइल – 08121435033]  

हिंदी का दूसरा महाकुंभ वर्धा में


हिंदी का दूसरा महाकुंभ वर्धा में 01 फरवरी से
पाँच दिवसीय समारोह में देशभर से लगभग 200 हिंदी लेखक करेंगे विमर्श

वर्धा, 30 जनवरी 2013 

वर्धा स्थित महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय से 5 फरवरी, 2013 के दौरान ‘हिंदी का दूसरा समय’ कार्यक्रम का भव्‍य आयोजन कर रहा हैजिसमें लगभग 200 से अधिक हिंदी के साहित्‍यकारपत्रकाररंगकर्मी व सामाजिक कार्यकर्ता विवि‍ध विषयों पर विमर्श करेंगे।

समारोह का उद्घाटन फरवरी को प्रात: 10 बजे अनुवाद एवं निर्वचन विद्यापीठ के प्रांगण में बने आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी सभागार में प्रोनामवर सिंह करेंगे। विशिष्‍ट अतिथि के रूप में प्रो.निर्मला जैन की उपस्थिति में समारोह की अध्‍यक्षता कुलपति विभूति नारायण राय करेंगे।

पाँच दिवसीय इस आयोजन में विवि के पूर्व कुलपति प्रो.जी.गोपीनाथन, केदारनाथ सिंहकाशीनाथ सिंहप्रो.गंगा प्रसाद विमल, रवीन्‍द्र कालिया, खगेन्‍द्र ठाकुर, रमणिका गुप्‍ताममता कालिया, अरुण कमल, पुरूषोत्‍तम अग्रवाल, हरिराम मीणा, राजीव भार्गवसुधा सिंह, प्रदीप भार्गवमोहन आगाशेवामन केंद्रे, रमेश दीक्षित, पुण्‍य प्रसून वाजपेयीनामदेव ढसालजे.वी.पवारबद्रीनारायणअखिलेशसंजीवजयनंदनआनंद हर्शुलशिवमूर्तिकुणाल सिंहचंदन पाण्‍डेययशपाल शर्माअजित अंजुमहरि प्रकाश उपाध्‍यायजय प्रकाश कर्दमहेमलता माहेश्‍वरप्रकाश दुबेशशि शेखरसंदीप पाण्‍डेय,बी.डीशर्माप्रेमपाल शर्मारघु ठाकुरप्रेम सिंहचन्‍द्रप्रकाश द्विवेदीकैलाश वनवासीमनोज रूपड़ामहुआ माजीसृंजय,भारत भारद्वाज तथा विकास मिश्र आदि सहित विभिन्‍न नामचीन हस्तियां उपस्थित रहेंगी।

      विदित हो कि चार वर्ष पूर्व महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय,वर्धा ने पांच दिवसीय ‘हिंदी समय’ का आयोजन किया था। ‘हिंदी का दूसरा समय’ के आयोजन के बारे में कुलपति विभूति नारायण राय से पूछने पर उन्‍होंने बताया कि हिंदी समय के आयोजन के बाद के चार वर्षों में सभी क्षेत्रों में तेजी से बदलाव हुए हैं और सूचना-संचार की विराटता के इस युग में हिंदी का दखल बहुत तेजी से बढ़ता जा रहा है। दुनिया के तमाम देश भारत जैसे बड़े बाजार के निमित्‍त हिंदी को अपने भविष्‍य का रास्‍ता मान रहे हैं। स्‍वयं हमारे विश्‍वविद्यालय में विदेशी छात्रों की संख्‍या में दिनोंदिन होने वाली वृद्धि विश्‍व में हिंदी की बढ़ती जरूरत और इसकी अपरिहार्यता का प्रतीक है। इसकी बढ़ती पहुँच के साथ इसके विरूद्ध षडयंत्रों की भी शुरूआत हो चुकी है। विकिपीडिया के अनुसार कुछ वर्ष पहले विश्‍वभर में संख्‍या के लिहाज से सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषाओं में जहाँ हिंदुस्‍तानी का स्‍थान दूसरा थाअब हिंदी को चौथे पायदान पर लाया गया है और मजेदार बात तो यह है कि शीर्ष की सौ भाषाओं में मैथिलीभोजपुरीअवधीहरियाणवीमगही जैसी हिंदी की बोलियों की गणना की गयी है। यह एक निर्विवाद तथ्‍य है कि इन्‍हीं बोलियों के सम्मिलित रूप को हिंदी कहा जाता है। इनसे प्राप्‍त जीवन शक्ति से हिंदी फूलती है। ठेठ हिंदी का ठाठ इन्‍हीं बोलियों के सौंदर्य से निर्मित होता है।

      श्री विभूति नारायण राय ने कहा कि हमारी इस बढ़ती स्‍वीकार्यता का एक दूसरा पहलू भी है। यदि हम गौर से देखें तो हमारा यह समय एक विराट विचारशून्‍यता का भी है। हिंदी साहित्‍य में किसी नये सिद्धांत की बात तो दूर पिछले कई दशक से हम एक सार्थक बहस चलाने में भी समर्थ नहीं हुए हैं। हमारी भाषा की अन्‍य अभिव्‍यक्तियाँ मसलन दलित विमर्श,स्‍त्री-विमर्श आदि भी अन्‍य भारतीय तथा विदेशी भाषाओं में किये जा रहे कार्यों का एक अनुवादित संस्‍करण ही है। हिंदी सिनेमा जरूर किन्‍हीं हद तक अपने नये मुहावरे में बात करने की कोशिश कर रहा है परंतु वहाँ भी बाज़ार और सनसनी का एक ऐसा वातावरण पसरा है कि इस समय में श्‍याम बेनेगलऋत्विक घटकमणि कौल जैसे फिल्‍मकारों को ढूँढ़ना निरर्थकता ही मानी जाएगी।

      कमोवेश ऐसी ही स्थिति हिंदी रंगमंच और इस भूभाग की कलाओं की भी है। पिछले कई दशकों से कोई महत्‍वपूर्ण नाटक हिंदी में लिखा या मंचित हुआ होयाद नहीं आता। अन्‍य ललित कलाओं में भी कोई महत्‍वपूर्ण आंदोलन इन प्रदेशों में दिखाई नहीं देता।

      यह वक्‍त थोड़ा ठहर कर सोचने का है। ऐसा नहीं कि हमारी ऊर्जा चुक गई है अथवा हम ऐसी जड़ता से निकलने की कोई कोशिश नहीं कर रहे हैं। लेकिन उन कोशिशों कोजो इस विकल्‍पहीन होते समय में एक सार्थक विकल्‍प रचने की कोशिश कर रहे हैंएक साथ समग्रता में समझने की जरूरत हैनहीं तो उत्‍तर–आधुनिक सोच हमें आश्‍वस्‍त करने में सफल हो जाएगी कि प्रत्‍येक विधाप्रत्‍येक कलाप्रत्‍येक अभिव्‍यक्ति अपने आप में स्‍वायत्‍त है और उसका समाज से भी कोई सीधा संबंध नहीं है।

      आयोजन के बारे में उन्‍होंने बताया कि हम यह मानते हैं कि आप हमारे सरोकारों और चिंताओं से सहमत होंगे और पाँच दिनों तक 01 से 05 फरवरी, 2013 तक चलने वाले इस कार्यक्रम हिंदी का दूसरा समय’ में उत्‍साह और तैयारी के साथ शिरकत करेंगे ताकि हिंदी की पहचान सिर्फ सबसे ज्‍यादा बोली जाने वाली भाषा या सबसे बड़े बाजार की ही नहीं,बल्कि वह समर्थ बने तो अपने सरोकारों के कारणअपनी अभिव्‍यक्ति की अपार संभावनाओं के कारण।

      संगोष्‍ठी के संयोजक राकेश मिश्र ने कहा कि हिंदी को विश्‍वभाषा बनाने की दिशा में विश्‍वविद्यालय का यह आयोजन सार्थक पहल के रूप में साबित होगा। उन्‍होंने कहा कि हिंदी को लेकर पूरे विश्‍व में चल रही बहस को यह आयोजन दिशादर्शक सिद्ध होगा। उन्‍होंने विश्‍वास जताया कि किसी विश्‍वविद्यालय स्‍तर पर इतने बड़े पैमाने पर किया गया यह आयोजन साहित्‍य और समाज में अपनी एक अलग पहचान बनाएगा।

      ‘हिंदी का दूसरा समय’ का मुख्‍य समारोह अनुवाद एवं निर्वचन विद्यापीठ के प्रांगण में आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी सभागार में सम्‍पन्‍न होगा वहीं समानांतर सत्र सआदत हसन मंटो कक्ष (स्‍वामी सहजानंद सरस्‍वती संग्रहालय),महादेवी वर्मा कक्षरामचंद्र शुक्‍ल कक्ष (समता भवन), डी.डीकौसांबी कक्ष (जनसंचार विभाग), स्‍वामी अछूतानंद सभागार(महापंडित राहुल सांकृत्‍यायन केंद्रीय पुस्‍तकालयमें सम्‍पन्‍न होंगे। इन सत्रों में हिंदी रचनाशीलता की पहुंच और उसका सामर्थ्‍यनव राजनैतिक विमर्श में हिंदी की उपस्थितिसंचार-सूचना की विराटता की वास्‍तविकता और हिंदीसृजनात्‍मक अभिव्‍यक्ति के दृश्‍यमान आधार और हिंदीहिंदी जातीयता का सवाल और ज्ञान का उत्‍पादनहिंदी प्रदेश की राजनीति और प्रगति‍शीलता आदि मुख्‍य विषयों पर विमर्श होगा। कार्यक्रम का समापन 5 फरवरी को दोपहर 3.00 बजे हजारी प्रसाद द्विवेदी सभागार में होगा। इसमें वक्‍ता के रूप में डॉ.बी.डीशर्मारघु ठाकुरराजेंद्र राजनप्रो.प्रेम सिंह और प्रेमकुमार मणि उ‍पस्थित रहेंगे।


`अस्‍पताल के बाहर टेलीफोन’ के लिए पवन करण को `केदार सम्‍मान' प्रदान






`अस्‍पताल के बाहर टेलीफोन के लिए पवन करण को  `केदार सम्‍मान' प्रदान 




[Image(461).jpg] केदार शोध पीठ, बॉंदा द्वारा हिन्‍दुस्‍तानी एकेडमी, इलाहाबाद के सभागार में आयोजित भव्‍य समारोह में कल ‘अस्‍पताल के बाहर टेलीफ़ोन’ कविता संग्रह के लिए पवन करण को केदार सम्‍मान,1 2011 से सम्‍मानित किया गया। सम्‍मान समारोह में महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय,वर्धा के कुलाधिपति प्रो.नामवर सिंह, भारत भारद्वाज, दूधनाथ सिंह, पवन करण व महेश कटारे मंचस्‍थ थे। महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय,वर्धा विश्‍वविद्यालय के कुलपति विभूति नारायण राय ने समारोह की अध्‍यक्षता की।

हिंदी विश्‍वविद्यालय, वर्धा बना शमशेर का स्‍थायी घर


हिंदी विश्‍वविद्यालय, वर्धा बना शमशेर का स्‍थायी घर

विश्‍वविद्यालय को मिला दुर्लभ पाण्‍डुलिपियों के अलावा शमशेर साहित्‍य का स्‍वत्‍वाधिकार भी, आज का दिन मील का पत्‍थर -कुलपति



                वर्धा में नागार्जुन सराय भी 
वर्धा दि. 12 मई 2012: महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय के साथ आज एक और महापुरूष का नाम जुड़ गया। फादर कामिल बुल्‍के छात्रावास के पास नवनिर्मित अतिथि गृह नागार्जुन सराय का उदघाटन आज हिंदी के विख्‍यात कवि केदार नाथ सिंह ने किया। इस अवसर पर कुलपति विभूति नारायण राय, प्रतिकुलपति प्रो. ए. अरविंदाक्षन, कुलसचिव डॉ. के. जी. खामरे, विशेष कर्तव्‍य अधिकारी नरेन्‍द्र सिंह, आलोचक निर्मला जैन, प्रो. गंगाप्रसाद विमल, नरेश सक्‍सेना, रंजना अरगड़े, विजय मोहन सिंह समेत बड़ी संख्‍या में विश्‍वविद्यालय कर्मी एवं विद्यार्थी उपस्थित थे। अतिथियों ने इस मौके पर नागार्जुन की मूर्ति पर माल्‍यार्पण कर अपने श्रद्धासुमन अर्पित किये। सनद रहे कि हिंदी की कई विभूतियों के नाम से इस विश्‍वविद्यालय के विभिन्‍न भवनों और मार्गों का नामकरण किया गया है। अध्‍यापकों और कर्मचारियों के लिए बने आवासों को तीन संकुलों में बांटा गया है- अज्ञेय संकुल, शमशेर संकुल और केदार नाथ अग्रवाल संकुल। छात्रों के लिए गोरख पाण्‍डे और बिरसा मुण्‍डा छात्रावास है तो छात्राओं के लिए सावित्रीबाई फुले छात्रावास। केंद्रीय पुस्‍तकालय का नाम राहुल सांकृत्‍यायन के नाम पर है तो तीन सभागारों के नाम क्रमश: गौतम बुद्ध, डॉ. आंबेडकर और हबीब तनवीर के नाम पर। तीन मार्गो के नाम क्रमश: प्रेमचंद मार्ग, भारतेंदु मार्ग और निराला मार्ग हैं। दो पहाडियों का नामकरण गांधी हिल और कबीर हिल के नाम पर किया गया है।
वर्धा दि.12 मई 2012 ।
हिंदी के सुपरिचित कवि केदार नाथ सिंह ने कहा है कि शमशेर बहादुर सिंह विलक्षण दोआब के कवि हैं। उनकी रचनाओं में हिंदी और उर्दू की दोभाषिक संस्‍कृतियाँ मिलती हैं। शमशेर जितने हिंदी के कवि थे उतने ही उर्दू के। डॉ. केदार नाथ सिंह आज महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय के स्‍वामी सहजानंद सरस्‍वती संग्रहालय में कालजयी कवि शमशेर बहादुर सिंह की 19वीं पुण्‍यतिथि पर आयोजित गरिमामय समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस समारोह में प्रसिद्ध लेखिका डॉ. रंजना अरगड़े ने शमशेर की प्रकाशित-अप्रकाशित रचनाओं की पांडुलिपियाँ, चित्रकृतियाँ और उनके निजी उपयोग की सामग्री तथा शमशेर की रचनाओं की कापीराइट विश्‍वविद्यालय को सौंपी। 

पुलिस अफसर हत्या : दूसरा पहलू

पुलिस अफसर हत्या : दूसरा पहलू
- डॉ वेदप्रताप  वैदिक 




मुरैना में होली के दिन हुई पुलिस अफसर नरेंद्र कुमार की हत्या ने सारे देश में सनसनी-सी फैला दी थीमाना यह जा रहा था कि वह किसी खनन-माफिया की करतूत है और यह नहीं हो सकता कि इस माफिया के मप्र सरकार के साथ सूत्र न जुड़े होंयह कैसे हो सकता है कि एक मामूली ट्रैक्टर ड्राइवर एक पुलिस अफसर को कुचल कर मार डालेकांग्रेस के कुछ प्रांतीय नेताओं ने टीवी चैनलों पर यह तक कह डाला कि खनन माफिया के तार सीधे मुख्यमंत्री और उनकी पत्नी के साथ जुड़े हैंलेकिन अब अखबारों में जो तथ्य आ रहे हैंउनसे सारे निष्कर्ष उल्टे पड़ते दिखाई पड़ रहे हैंट्रैक्टर चलाने वाले किसान मनोज गूजर ने माना कि नरेंद्र कुमार को उसी के ट्रैक्टर ने कुचला है लेकिन यह जान-बूझकर नहीं हुआ हैपुलिस अफसर नरेंद्र कुमार ने मनोज पर पिस्तौल तानी और उसे रुकने के लिए कहालेकिन मनोज ने डर के मारे ट्रैक्टर तेजी से भगा लियाइस पर नरेंद्र ने ऊपर कूदकर ट्रैक्टर का स्टीयरिंग व्हील पकड़ने की कोशिश की और वे फिसलकर नीचे गिर पड़ेइस हड़बड़ में वे कुचले गएमनोज के भाइयों का कहना है कि वह अच्छे पुलिस अफसर थे और उनके उनके परिवार का कोई झगड़ा नहीं थालोग अपना ट्रैक्टर इसलिए अंधाधुंध भगा ले जाते है कि पकड़े जाने पर पुलिस मोटी रिश्वत माँगती है|

भारत भवन की 30वीं वर्षगाँठ का समारोह


भारत भवन की 30वीं वर्षगाँठ का समारोह गरिमापूर्ण ढंग से सम्पन्न


बहुकला केंद्र, भारत भवन की 30वीं वर्षगाँठ का समारोह 13 से 19 फरवरी 2012 तक आयोजित किया गया। इस समारोह में वैविध्य से परिपूर्ण कलात्मक आयोजन सम्पन्न हुए।

भारत भवन के वर्षगाँठ समारोह का शुभारम्भ मध्यप्रदेश के संस्कृति मन्त्री माननीय श्री लक्ष्मीकान्त शर्मा द्वारा किया गया। समारोह का शुभारम्भ करते हुए संस्कृति मन्त्री ने  भारत भवन को देश-दुनिया का अनूठा  कलाकेन्द्र कहा और उन्हानें  इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि भारत भवन की गरिमा और प्रतिष्ठा के अनुकूल  30वीं  वर्षगाँठ का समाराहे आयोजित हो रहा है और  देश के अग्रणी कलाकार इस समारोह में अपनी प्रस्तुतियाँ दे रहे हैं। संस्कृति मन्त्री ने यह सकंल्प प्रकट किया कि भारत भवन अपनी उत्कृष्ट कलात्मक गतिविधियों से देश का अग्रणी कला संस्थान बना रहेगा और कलाकारों की रचनाशीलता को यहाँ भरपूर सम्मान और मंच दिया जाता रहेगा। भारत भवन की गतिविधियों को  गरिमापूर्ण ढंग से आयोजित करने  में  किसी तरह से आथिर्क तंगी आड़े नहीं आने दी जाएगी इसका भी आश्वासन  संस्कृति मन्त्री ने सभागार में अपने सम्बोधन के दौरान प्रकट किया।

संभव है आप भी मेरी तरह भावुक हो कर फूट फूट कर रो पड़ें

आप को अत्यंत सुखद आश्चर्य हो सकता है अथवा संभव है कि आप भी मेरी तरह भावुक हो कर फूट फूट कर रो पड़ें कि इस पाकिस्तानी चैनल के प्रस्तोता ने लाल बहादुर शास्त्री के जीवन की सादगी, ईमानदारी, त्याग, आदर्शों और जीवन पर एक समूचा कार्यक्रम ही समर्पित कर दिया ( आगे स्वयं देखें )।

हिन्दी पर सरकारी हमले का आखिरी हथौड़ा


हिन्दी पर सरकारी हमले का आखिरी हथौड़ा 



गृह मंत्रालय के एक नए आदेश के अनुसार अब से सरकारी कार्यालयों में कामकाज में कामकाज राजभाषा हिन्दी की अपेक्षा हिंगलिश में किया जा सकेगा।  चिदम्बरम के विश्वबैंक के एजेंडा का सच। सरकार ने हिन्दी पर आखिरी हथौड़ा चला दिया है, हमला बोल दिया है। 


यदि आप हिन्दी से प्रेम करते हैं तो देश-भर में अपने अपने तरीके से इस आदेश के विरुद्ध आंदोलन चलाएँ और  इस आदेश की होली जलाएँ, विरोध की हिम्मत दिखाएँ। 


नीचे, प्रभु जोशी जी के सौजन्य से प्राप्त, आदेश की मूल प्रति --


Policy Sep 11

हिंदी विवि में त्रि-दिवसीय फिल्‍म समारोह का उद्घाटन


हिंदी विवि में फिरोज अब्‍बास खान ने किया त्रिदिवसीय फिल्‍म समारोह का उद्घाटन
फिल्‍मोत्‍सव में कई फिल्‍मी हस्तियाँ थीं मौजूद, `गांधी माई फादर' रही उद्घाटन फिल्‍म  


वर्धा, 06 सितम्‍बर, 2011;

 महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय, वर्धा में पहली बार आयोजित त्रिदिवसीय (6-8 सितम्‍बर, 2011) महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय फिल्‍म समारोह का उद्घाटन कई फिल्‍मी हस्तियों की मौजूदगी में सुप्रसिद्ध फिल्‍म निर्देशक फिरोज अब्‍बास खान ने किया। फिरोज अब्‍बास खान की फिल्‍म गांधी माई फादर उद्घाटन फिल्‍म रही। फिल्‍म समारोह की अध्‍यक्षता वि‍श्‍वविद्यालय के कुलपति विभूति नारायण राय ने की।

भारत में हो मेरा पुर्नजन्‍म


भारत में हो मेरा पुर्नजन्‍म

जापानी भाषा के विद्वान अकियो हागा हिंदी वि.वि. में प्रोफेसर के रूप में नियुक्‍त

अब हिंदी माध्‍यम से कीजिए विदेशी भाषा- स्‍पेनिश, चीनी, जापानी के पाठ्यक्रम



 जापानी भाषा के विद्वान एवं कवि अकियो हागा महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी वि‍श्‍वविद्यालय, वर्धा में प्रोफेसर के पद पर हाल ही में नियुक्‍त हुए हैं। वे विश्‍वविद्यालय में जापानी भाषा के विद्यार्थियों को पढायेंगे। ज्ञातव्य है कि विश्‍वविद्यालय में भाषा विद्यापीठ के अंतर्गत पहली बार हिंदी माध्‍यम से चीनी, स्‍पेनिश, जापानी भाषा में सर्टिफिकेट, डिप्‍लोमा व एडवांस्‍ड डिप्‍लोमा के पाठ्यक्रम संचालित किये जा रहे हैं।

ब्रिटेन में क्षेत्रीय हिंदी सम्मलेन संपन्न


ब्रिटेन में क्षेत्रीय हिंदी सम्मलेन २०११ संपन्न 

लन्दन/ 2 जुलाई 2011

 



लन्दन में दिनांक 24 से 26 जून, 2011 तक बर्मिंघम के एस्‍टन विश्‍वविद्यालय प्रांगण में यू. के. क्षेत्रीय हिन्‍दी सम्‍मेलन का आयोजन किया गया. इस सम्मलेन का आयोजन विभिन्न संगठनों के सहयोग से किया गया. भारतीय उच्‍चायोग, लन्‍दन और प्रधान कोंसुलावास, बर्मिंघम के संरक्षण में गीतांजलि बहुभाषी साहित्‍यक समुदाय द्वारा गीतांजलि ट्रेंट, चौपाल, एचसीए वेल्‍स, सैंडवेल कन्‍फेडरेशन ऑव इंडियन्स, संत निरंकारी मंडल यूके, कथा यूके, भारतीय भाषा संगम, नेशनल काउंसिल ऑव हिन्‍दू प्रीस्‍ट्स, संस्‍कृति यूके, डीयूटी नीदरलैण्‍ड के सहयोग से सम्मलेन को सफल बनाया जा सका.


UK REGIONAL HINDI CONFERENCE - 2011




यू. के. क्षेत्रीय हिंदी सम्मेलन-2011
UK REGIONAL HINDI CONFERENCE - 2011

Birmingham 24-26 June 2011

Venue:        Great Hall of the Aston University, King Edward VI House, 1 Aston Street, Eastside, Birmingham B4 7ET, Tel: 0121 359 3611

कार्यकम
PROGRAMME


Thursday, 23 June
2011
-
पंजीकृत प्रतिनिधियों का आगमन और होटल में चेक इन
Friday, 24 June 2011
0900 hrs
चाय
0930-1030 hrs
पंजीकरण
1100 hrs
समारोह का उद्घाटन – महामहिम श्री नलिन सूरी, भारतीय उच्चायुक्त यू.के. एवं सोविनियर तथा समारोह पत्रिका का विमोचन।
1215-1300 hrs
हिंदी की दशा और दिशा - बीज वक्तव्य -प्रो. के.डी. पालीवाल, दिल्ली विश्वविद्यालय।
1300-1400 hrs
दोपहर का भोजन
1400-1530 hrs
सत्र – 1, विषय - विश्व में हिंदी की दशा और दिशा  
अध्यक्षता - श्री महेन्द्र वर्मा,  हस्तक्षेप- डॉ. वंदना मुकेश शर्मा
1.
श्री जनार्दन अग्रवाल - दीपक तले अंधेरा
1400 बजे
2.
श्रीमती कादम्बरी मेहरा- वैश्विक हिंदी साहित्य और हमारा भारत
1415 बजे
3.
श्री ऐश्वर्ज कुमार - बने चट्टान हिंदी, दीवार नहीं
1430 बजे
4.
श्रीमती जय वर्माब्रिटेन में हिंदी सारभूत
1445 बजे

चर्चा
 1500  बजे
1530-1545 hrs
चाय
1545-1700 hrs
सत्र – 2, विषय - हिंदी एवं भारतीय संस्कृति - युवा पीढ़ी के परिपेक्ष्य में ।
अध्यक्ष - श्री आसिफ़ इब्राहीम मंत्री(समन्वय)
हस्तक्षेप – श्रीमती सरोज श्रीवास्तव
1.
बीज वक्तव्य - श्री गगन शर्मा, भारत एक विश्व रूपी परिवार का हिस्सा
1600 बजे
2.
श्री ज्ञानसिंह मान - हिंदी भाषा एवं भारतीय संस्कृति (इक्कीसवीं सदी के युवा वर्ग के संदर्भ में)
1630 बजे

चर्चा
1645 बजे
1830-2100 hrs
सांस्कृतिक कार्यक्रम-1:
उद्धाटन - श्रीमती मोनिका मोहत्ता, निदेशक, नेहरू केन्द्र, लंदन
हिंदी और भोजपुरी लोकगीत। कलाकार - श्रीमती विजय भारती एवं श्री ओंकारेश्वर पाण्डेय  (भारत से)      
स्थानीय कलाकारों की प्रस्तुति - आयुषी जैन, अलीशा भटनागर, वनुयाचेलवनाथन, थनुजा, शेरन जैकब, नीतू शर्मा, अगषजा वेथरनियम, दिव्या शर्मा, जैसिका सेनिहा, विभाती भाटिया, शिखा मेकार्थी, गुरप्रीत भाटिया।
प्रस्तुति - श्रीमती स्वर्ण तलवाड एवं रमा जोशी
2100 hrs
रात्रि भोजन
Saturday, 25 June 2011
0900 hrs
चाय
0930-1045 hrs
सत्र - 3  विषय - हिंदी की वैश्विकता एवं हिंदी लिपि
अध्यक्षता - डा कृष्ण दत्त पालीवाल
हस्तक्षेप - प्रो मोहन कांत गौतम
1.
श्री परमानंद पांचाल - बीज वक्तव्य - विश्व की सर्वोत्तम लिपि, देवनागरी लिपि
0930 बजे
2.
श्री वेद मित्र भाषा में शुद्ध वर्तनी और उच्चारण का महत्व
1000 बजे

चर्चा
1015 बजे
1045-1100 hrs
चाय
1100-1300 hrs
सत्र - 4  विषय - हिंदी भाषा के शिक्षण की समस्याएं और चुनौतियां
सत्र की अध्यक्षता: फ्रंचेस्का ओरसीनी
हस्तक्षेप- श्री ऐश्वर्ज कुमार

श्री महेन्द्र वर्मा – बीज वक्तव्य - ब्रिटेन में हिंदी अध्ययन और अध्ययापन के कुछ पहलू
1100  बजे
1.
लुदमीला खोखलोवा, बोरिस जाखारीन - मास्को विश्वविद्यालय में हिंदी पढ़ाने का अनुभव (रूस)
1130 बजे
2.
येकातेरीना पानिमा, हिन्दी के अध्ययन की विधियाँ – शब्दावली और शब्दरचना, (रूस)
1145 बजे
3.
अर्चना पैन्यूली, हिन्दी शिक्षण की समस्यायें और हिन्दी अध्यापकों की योजना, समस्या व समाधान (डेनमार्क)
1200 बजे
4.
डॉ० गेनादी श्लोम्पेर, ब्रू भाषा भाषी छात्रों को हिंदी पढ़ाने की समस्याएं और उनका समाधान, (इज़रायल)
1215 बजे
5.
डा. श्रीराम परिहार हिंदी शिक्षण और प्रशिक्षण की समस्याएं, चुनौतियां एवं समाधान
1230 बजे

चर्चा
1245 बजे
1300-1400 hrs
दोपहर का भोजन
1400-1530 hrs
सत्र-5  - विषय - यू.के. में हिंदी शिक्षण की समस्याएं और चुनौतियां।
अध्यक्षता - प्रो श्याम मनोहर पाण्डेय
हस्तक्षेप - श्री राकेश दुबे
1.
श्रीमती वंदना मुकेश हिंदी शिक्षण एवं प्रशिक्षण में समस्याएँ - चुनौतियाँ एवं समाधान, (यू.के.)
1400 बजे
2.
डॉ. कविता वाचक्नवी - हिन्दी कम्प्यूटिंग: उपलब्धि एवं चुनौतियाँ
1415 बजे
3.
श्री मोहनकांत गौतम - हॉलैण्ड में भारतवंशियों की नई पीढ़ी हिंदी और हिंदी की संस्कृति
1430 बजे
4.
फ्रंचेस्का ओरसीनी - उच्च हिंदी शिक्षण में वेब प्रयोग
1445 बजे

चर्चा
1500 बजे
1530-1545 hrs
चाय
1545-1715 hrs
सत्र - 6  विषय - हिंदी के प्रचार प्रसार में प्रवासियों का योगदान
अध्यक्षता - प्रो श्रीश जैसवाल  हस्तक्षेप - लुदमीला खोखलोवा
1.
श्रीमती उषा राजे सक्सेना - ब्रिटिश हिंदी साहित्य के 30 वर्ष और प्रथम हिंदी कहानी
1545 बजे
2.
श्री राकेश दुबे - हिंदी और प्रवासी भारतवंशी
1600 बजे
3.
श्रीमती पुष्पा सिंह विसेन - विश्व में हिंदी की दशा एवं प्रवासी योगदान
1615 बजे
4.
श्रीमती शिखा वार्ष्णेय - हिंदी के उत्थान में वेब पत्रकारिता का योगदान
1630 बजे

चर्चा
1645 बजे
1830-2100 hrs
सांस्कृतिक कार्यक्रम -2 कविता पाठ
उद्धाटन - श्री गुरूराज राव ,सी जी बर्मिंघम
अध्यक्षता - श्री केशरी नाथ त्रिपाठी
भारत के कवि - श्री केशरी नाथ त्रिपाठी,श्रीमती विजया भारती,श्री ओंकारेश्वर पाण्डेय,डा पुष्पा सिंह विशेन, वर्तिका नंदा
यू के के कवि - श्री सोहन राही,.श्री राम शर्मा मीत,डा पदमेश गुप्त,, श्रीमती नीना पाल श्रीमती श्यामा कुमार, श्री नरेन्द्र ग्रोवर, डा कृष्ण कन्हैय्या, श्री चमन लाल चमन,
प्रस्तुति - श्रीमती स्वर्ण तलवाड एवं ऱमा जोशी संचालन-डा वंदना मुकेश शर्मा
2100 hrs
रात्रि भोजन
Sunday, 26 June 2011
0900 hrs
चाय
0930-1045 hrs
सत्र -7 विषय - तृतीय एवं चतुर्थ भाषा के रूप में हिंदी
अध्यक्षता - श्री विकास कुमार झा    
हस्तक्षेप – श्री आनन्द कुमार
श्री श्रीश जैसवाल विषय – बीज वक्तव्य - विदेशी भाषा के रूप में हिंदी शिक्षण: कुछ आयाम
0930 बजे

श्रीमती चित्रा कुमार एवं श्री ऐश्वर्ज कुमार - दूसरी भाषा के रूप में हिंदी
1000 बजे

चर्चा
1015 बजे
1045-1100 hrs
चाय
1100-1300 hrs
विषय- हिंदी एवं भारतीय संस्कृति युवा पीढी के परिप्रेक्ष्य में - संवाद
अध्यक्षता – कैलास बुधवार हस्तक्षेप-डा कृष्ण कुमार
संवाद मंडल-
डा परमानंद पांचाल
श्री गगन शर्मा,
बोरिस जाकरिन,
मोहन कांत गौतम,
गौतम सचदेव,
परताब हीरानी
1300-1400 hrs
Lunch
1400-1530 hrs
Brain storming Closing session and passing of Resolutions
1530-1700 hrs
Closing and award ceremony by the Deputy High Commissioner of India, London Mr. Rajesh N. Prasad
1700 hrs
Farewell Reception  समापन



Note:
i
Each Keynote address will be for 30 minutes except the inaugural one
ii
Each presentation will be for 15 minutes
iii
BOOK EXHIBITION BY PUBLISHERS THE WHOLE DAY - 24-26 June 2011

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