राजस्थान की पाक सीमा पर आतंक




राजस्थान की पाक सीमा पर आतंक का राज
अवधेश आकोदिया

अजमेर के सहायक पुलिस अधीक्षक राहुल प्रकाश के अनुसार भर्ती घोटाले के अनुसंधान में पता चला कि कुछ सैन्य लिपिकों ने फर्जी दस्तावेज के बूते कुछ लोगों को सेना में भर्ती कराया है। उनके संबंध आईएसआई से होने की आशंका है। जिला पुलिस की यह आशंका निर्मूल नहीं। उत्तर-पूर्व इलाकों की सेना भर्ती में ऐसा फर्जीवाड़ा उजागर हो चुका है।


पाकिस्तान से लगी राजस्थान की एक हजार किलोमीटर लंबी अंतर्राष्ट्रीय सीमा आतंकवादियों के लिए स्वर्ग साबित हो रही हैं। सूबे की इस पश्चिमी सीमा के रास्ते धडल्ले से आतंकवादी, जाली नोट, मादक पदार्थ और अवैध हथियार आ रहे हैं, जिनका उपयोग देश में आतंक फैलाने के लिए किया जा रहा है। राजस्थान की सीमा के सहारे आ रहे खतरे का खुलासा करती रिपोर्ट!


राजस्थान का पश्चिम इलाका। दूर-दूर तक रेत के टीलों के बीच कुछ घर। यहां गुजर-बसर करना किसी जंग जीतने से कम नहीं है। गंगानगर और हनुमानगढ़ जिलों को छोड़ दें तो खाना और पानी सरीखी मूलभूत जरूरतों को हासिल करने के लिए भी कड़े जतन करने होते हैं। थार के इस रेगिस्तान में पश्चिम की ओर आगे बढ़ते हैं तो पाकिस्तान की सीमा आ जाती है।


तारबंदी के बीच बीएसएफ के जवानों की चौकसी को देखकर लगता है कि यहाँ परिंदा भी पर नहीं मार सकता, पर सच्चाई कुछ ओर है। सीमा के सहारे बड़ी संख्या में घुसपैठिए, जाली नोट, मादक पदार्थ और अवैध हथियार इधर-उधर हो जाते हैं और किसी को भनक तक नहीं लगती है। घुसपैठियों और तस्करों के लिए पाकिस्तान से सटी राजस्थान की सीमा आसान रास्ता बन गई है। एक हजार किलोमीटर से ज्यादा लंबी इस अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर कई ऐसी जगह हैं, जहां घुसपैठियों और तस्करों को रोकने वाला कोई नहीं है। सीमा की सुरक्षा के लिए तारबंदी और गश्त जैसे परंपरागत तरीके फ्लाप साबित हो रहे हैं।



राजस्थान से लगती अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर पाकिस्तान से घुसपैठ तो कई सालों से होती आ रही है, पर सुरक्षा एजेंसियों को इस आशंका ने परेशानी में डाल दिया है कि पाकिस्तान घुसपैठियों के वेश में तालिबानियों को भारतीय सीमा में घुसाने की कोशिश कर रहा है। इस सिलसिले में पिछले कुछ महीनों में हुई घटनाएँ पेशानी पर बल डालने वाली हैं।



अप्रैल में फरीदसर सीमा चौकी के जवानों ने पाकिस्तान के लियाह निवासी 26 वर्षीय घुसपैठिए जुल्फिकार को पकड़ा। उससे पाकिस्तानी टेलीकॉम कंपनियों के आठ सिम कार्ड और एक मोबाइल फोन मिला है। लियाह पंजाब प्रांत के अंतिम छोर पर है, जहाँ से नॉर्थ-वेस्ट फ्रंटियर शुरु होता है। यहाँ पर तालिबानियों का साम्राज्य फैल गया है। इसी तरह 23 मार्च को गंगानगर सेक्टर के करणपुर क्षेत्र में सीमा सुरक्षा बल की मांझीवाला सीमा चौकी के जवानों द्वारा आत्मसमर्पण की चेतावनी की अनदेखी करने वाले 17 और 21 वर्ष के दो घुसपैठियों को मार गिराने के बाद पाँच सिम कार्ड और एक नक्शा मिलना सचमुच चौंकाने वाला है। फरवरी में 41 आरएस।



सीमा चौकी पर तारबंदी पार करने पर मारे गए घुसपैठिए की एक जैकेट और 11 प्लास्टिक गेंदों की रहस्यमय गुत्थी भी अभी तक सुलझ नहीं पाई है। सीमा सुरक्षा बल गंगानगर सेक्टर के उप-महानिरीक्षक सीआर चौहान का कहना है कि मांझीवाला सीमा चौकी क्षेत्र में मारे गए दोनों पाक घुसपैठिए निश्चितरूप से आतंकवादी थे। इनसे मिले पाँच पाकिस्तानी सिम कार्डों र्से जाहिर है कि इन्हें किसी खास मकसद से भारतीय सीमा में भेजा गया था।


सीमापार से घुसपैठ के इस नए तौर-तरीकों और बढ़ती घटनाओं ने सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं। सूत्रों का कहना है कि इस बात पर आश्चर्य है कि एकदम शांत रहने वाली राजस्थान से लगी अंतर्राष्ट्रीय सीमा को जानबूझ कर अशांत एवं संवेदनशील क्यों बनाया जा रहा हैं। सीमा सुरक्षा बल के अधिकारियों का कहना है कि जम्मू-कश्मीर के साथ राजस्थान गुजरात से सटी सीमा के पास चल रहे शिविरों से आतंकवादी घुसपैठ की फिराक में है। इसके लिए बल को मजबूत एवं हाईटेक करने के लिए आधुनिकीकरण की प्रक्रिया पूरी होने वाली है। राजस्थान में बीकानेर में नया फ्रंटियर मुख्यालय बनाया जा रहा है। नई 19 सीमा चौकियाँ भी स्थापित की जायेंगी।


पाकिस्तान के नापाक इरादों की वजह से अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर घुसपैठ की बढ़ती घटनाओं के मद्देनजर केन्द्रीय गृहमंत्री पी। चिदम्बरम ने भी लोकसभा चुनाव से पहले बीकानेर सेक्टर की सीमा चौकियों का दौरा करके सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया था। राजस्थान फ्रंटियर के उप-महानिरीक्षक आर. सी. ध्यानी का कहना है कि गृहमंत्री के निर्देशानुसार सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी करने के साथ सुरक्षाबलों को अत्यधिक सतर्क किया गया है। सीमा के रास्ते देश में आने वाले ये आतंकवादी आईएसआई के इशारे पर काम करते हैं और आतंकी घटनाओं को अंजाम देने के लिए पूरा नेटवर्क खड़ा करते हैं।



इसके लिए नए-नए तरीके भी अपनाए जा रहे हैं। पिछले दिनों अजमेर में सेना भर्ती घोटाले के उजागर होने के बाद की जा रही जाँच में मिले संकेतों से देश की सुरक्षा से जुड़े आला अधिकारियों के पैरों तले से जमीन खिसक गई है। जाँच में पता चला है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के कुछ एजेंट भारतीय सेना का हिस्सा बन गए हैं।



अजमेर के सहायक पुलिस अधीक्षक राहुल प्रकाश के अनुसार भर्ती घोटाले के अनुसंधान में पता चला कि कुछ सैन्य लिपिकों ने फर्जी दस्तावेज के बूते कुछ लोगों को सेना में भर्ती कराया है। उनके संबंध आईएसआई से होने की आशंका है। जिला पुलिस की यह आशंका निर्मूल नहीं। उत्तर-पूर्व इलाकों की सेना भर्ती में ऐसा फर्जीवाड़ा उजागर हो चुका है।



राहुल प्रकाश ने साफ तौर पर कहा कि प्रारंभिक पड़ताल में ऐसे संकेत मिले हैं कि आईएसआई ने कुछ लोगों को विशेष मकसद से सेना में भर्ती कराया है। शारीरिक रूप से तंदुरुस्त लोग सीधी भर्ती में आवश्यक दस्तावेज की मदद से आसानी से भर्ती हो सकते हैं। देश की सुरक्षा के लिए इससे बड़ा खतरा और क्या हो सकता है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने हमारी सेना में ही घुसपैठ कर ली है।



पाकिस्तान से सटी राजस्थान की सीमा से आतंक फैलाने वाले दरिंदे ही नहीं, बल्कि देश को आर्थिक आतंकवाद की गिरफ्त में लेने के मकसद से भारी मात्रा में जाली नोटों की खेप भी आ रही हैं। हाल ही में जयपुर में नकली नोट चलाने के आरोप में पकड़े गए अभियुक्त आसिफ खान और सैयद सलीम हसन की राजस्थान में नकली नोटों के कारोबार का जाल फैलाने की साजिश थी। वे राज्य में कई एजेन्ट बनाना चाहते थे, लेकिन इससे पहले ही एसओजी ने उन्हें दबोच लिया। अभियुक्तों के कई राज्यों में रहने वाले लोगों से संबंधों का खुलासा हुआ है। इसके बाद एसओजी ने अन्य एजेन्सियों की मदद लेने की तैयारी कर ली है।



एसओजी के उप महानिरीक्षक राजेश निर्वाण ने बताया कि सलीम एवं आसिफ ने पूछताछ में खुलासा किया कि वे राजस्थान में बड़े पैमाने पर नकली नोट चलाने वाला गिरोह खड़ा करने की तैयारी में थे। इसके लिए उन्होंने कुछ लोगों से बातचीत भी की थी। अभियुक्तों का कहना है कि वे पहली बार नकली करेंसी लाए थे, जबकि पुलिस को अब तक की तफ्तीश से लगता है कि वे कई बार नकली नोट बाजार में चला चुके हैं।


सलीम के असम, बिहार एवं पश्चिम बंगाल में कई लोगों से सम्पर्क थे। इस आधार पर एसओजी का मानना है कि उसके सम्पर्क में आए लोग भी अवैध धंधों में लिप्त हो सकते हैं। इनकी तहकीकात के लिए एसओजी अन्य राज्यों की पुलिस एवं एजेंसियों से सम्पर्क कर रही है।



जाली नोटों के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। हर वर्ष देशभर में औसतन 6 करोड़ के जाली नोट बरामद होते है। इसका बड़ा हिस्सा राजस्थान की सीमा के जरिए देश में आता है। पिछले दिनों इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) ने केन्द्र सरकार को एक रिपोर्ट सौपी थी, जिसमे कहा गया था कि भारत 'आर्थिक आतंकवाद की चपेट में है। आईबी के मुताबिक तकरीबन 51 अरब डॉलर के बराबर जाली मुद्रा प्रचलन में चल रही है। इससे भी भारत में आतंककारी गतिविधियों को वित्तपोषण हो रहा है।


लगता यही है कि जो लोग आतंकवादी गिरोहों को चंदा देते है, उन्हें बदले में दुगुनी नकली मुद्रा का प्रलोभन दिया जाता है। यही कारण है देश में इतने ज्यादा जाली नोट आ गए है कि सरकार को उसी शृंखला के छपे अपने असली नोट बदलने पड़ रहे हैं। शुरुआत में सरकार ने 1000 रुपये व 500 रुपये के नोट ही बदलने का निर्णय किया है। इससे यही लगता है कि 10, 20, 50 और 100 के जाली नोट भी बाजार में काफी संख्या में चल रहे है। इनका बैंक चेस्ट में उनका पहुँचना तो अत्यंत गंभीर चिंता का विषय है।



सीमापार से जाली नोट ही नहीं भारी मात्रा में मादक पदार्थ और अवैध हथियारों की भी तस्करी होती है। सुरक्षाबलों की लाख कोशिशों के बावजूद सीमा से तस्करों की सेंधमारी जारी है। इस बार अफगानिस्तान में अफीम की रिकॉर्ड पैदावार के चलते स्मगलिंग की घटनाएं अचानक बढ़ गई हैं और ड्रग माफिया का नेटवर्क सक्रिय हो गया है। राजस्थान सीमा से आने वाली हेरोइन मुंबई होते यूरोप जा रही है। तस्करी पर लगाम लगाने के लिए नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो जोधपुर के बाद अब अजमेर में भी इंटेलीजेंस सेल शुरू कर रहा है।


अफगानिस्तान में तालिबान का दबदबा बढने से पाकिस्तान के रास्ते बड़े पैमाने पर हेरोइन भारत पहुंचाने की कवायद चल रही है, ताकि उसे यूरोपीय देशों में सप्लाई किया जा सके। पाकिस्तान से लेकर राजस्थान, दिल्ली व मुंबई तक इसका नेटवर्क सक्रिय है। राजस्थान सीमा पर तारबंदी के बाद मादक पदार्थ तस्करी पर काफी अंकुश लगा था, लेकिन अब फिर से सीमा पार और बाड़मेर, जैसलमेर व गंगानगर के सीमावर्ती गाँवों में पुराने तस्कर इस धंधे में जुट गए हैं।


खुफिया सूत्रों के अनुसार पाकिस्तान के कुख्यात तस्कर पाक गुप्तचर एजेंसी आईएसआई के मदद से सीमा पार हेरोइन पहुंचाने में सक्रिय है। बाड़मेर व जैसलमेर में दो साल पूर्व हेरोइन की बड़ी खेप पकड़े जाने के बाद बीते साल गडरा रोड से दो खेप आने का खुलासा हो चुका है। बाड़मेर व जैसलमेर सीमा से आने वाली हेरोइन जोधपुर से कोरियर के माध्यम से मुंबई भेजने का खुलासा बीते महीनों तीन नाइजीरियाई कोरियर पकड़े जाने से हो चुका है।


बीते सालों एक मंत्री पुत्र की नशीले टेबलेट की फैक्ट्री पकड़े जाने पर जोधपुर से मुंबई के रास्ते यूरोप तक ड्रग माफिया के तार जुड़े होने का खुलासा हो चुका है। बीकानेर व गंगानगर के रास्ते आने वाली हेरोइन अजमेर से मुंबई भेजने का नेटवर्क सक्रिय है। जोधपुर और कराची को जोडने वाली 'थार एक्सप्रेस' पाकिस्तान के लिए तस्करी का आसान जरिया बन गया है। राजस्थान सरकार ने एक खुफिया रिपोर्ट भारत सरकार को सौंपी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस ट्रेन के जरिए भारत में नकली नोट, नशीले पदार्थ और हथियार भेजे जाते हैं।



राज्य से लगती अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) दुश्मनों पर निगाह रखने का काम कर रही है। बीएसएफ की 78 कंपनियाँ यहाँ चौकसी रखती हैं, पर इसमें कुछ स्थानों पर इसमें ढील साफ तौर पर देखी जा सकती है। एक हजार किलोमीटर से ज्यादा लंबी इस सीमा पर तारबंदी की हुई है और फ्लड लाइट लगी हुई हैं। बीएसएफ की एक चौकी से दूसरी चौकी आसानी से नजर आती है। ऐसे में आतंकवादियों और तस्कारों की सेंधमारी सरकार और सुरक्षा बलों के लिए सिरदर्द बनी हुई है। सुरक्षा बलों के सूत्रों की मानें तो घुसपैठ के लिए आधुनिक हथियारों और तकनीक का अभाव है। वे इसके लिए लगातार सरकार को लिखते रहे हैं, पर अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई है।


जनवरी में दिल्ली में हुए मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सीमापार से हो रही घुसपैठ को प्रमुखता से उठाया था। बैठक में प्रधानमंत्री ने ठोस रणनीति बनाने का आश्वासन भी दिया था। कुछ इसी प्रकार को आश्वासन लोकसभा चुनाव से ऐन पहले राजस्थान आए गृहमंत्री पी. चिदंबरम ने भी दिया था, लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। इसमें जितनी देरी होती जाएगी, आतंकवादियों के हौंसले उतने ही बुलंद होते जाएँगे।




2 comments:

  1. अगर समय रहते हुए भारत सरकार एवं राजस्थान सरकार ने पाक सीमा पर होने वाली गतिविधियों पर काबू नहीं पाया तो बहुत बुरा हश्र होगा मुंबई हमले की पुनरावृती होगी . इस लेख में पूर्णतया सच्चाई है क्योंकि मैं खुद राजस्थान के उल्लेखित इलाके का मूल निवासी हूँ .
    आँखें खोलने वाले आलेख के लिए बहुत बहुत धन्यवाद !

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  2. हम तो चारों ओर से घिरे जा रहे हैं- उधर चीन अरुणाचल पर फैल रहा है, पाकिस्तान तो भाई है ही, इधर बर्मा-हां वही म्यामार भी परमाणु शक्ति बनने में लगा हुआ है और हमारे नेता केवल वोट की जुगाड़ में...

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आपकी सार्थक प्रतिक्रिया मूल्यवान् है। ऐसी सार्थक प्रतिक्रियाएँ लक्ष्य की पूर्णता में तो सहभागी होंगी ही,लेखकों को बल भी प्रदान करेंगी।। आभार!

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