"अक्ष्णोर्मे चक्षुरस्तु"

हिन्दी भारत

" - हिन्दी भारत - " (भारत व भारतीयता से जुड़े सभी साहित्यिक, सांस्कृतिक व सामाजिक प्रयासों, हिन्दी में रचनात्मक लेखन (विविध विधाएँ), भाषिक मंतव्यों, जीवनमूल्यों, पारस्परिक आदान-प्रदान की अभिवृद्धि हेतु) ***** हिन्दी भारत ***** "

सरबजीतों को यों मरने न दें

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- डॉ. वेद प्रताप वैदिक 


'दो से ज्यादा रहे होंगे सरबजीत सिंह के हत्यारे'सरबजीत सिंह अगर भारतीय जासूस होता या आतंकवादी होता तो क्या हमारी सरकार को पता नहीं होता? सरकार को सरबजीत के बारे में सब कुछ पता था| पता ही नहीं था, उसे गहरा विश्वास था कि वह जासूस नहीं था और लाहौर में हुए बम विस्फोट से उसका कुछ लेना-देना नहीं था| यह तथ्य सरबजीत की हत्या के बाद आए प्रधानमंत्री और विदेश सचिव के बयानों से भी सिद्घ होता है तो फिर क्या वजह है कि सरबजीत की रिहाई और रक्षा के प्रति हमारी सरकार ने इतना ढुल-मुल रवैया अपना रखा था? पहचान की गड़बड़ी के कारण असली अपराधी मंजीतसिंह छूट गया और उसकी जगह सरबजीत फंस गया| उसने 22 साल कोट लखपत की जेल में काट दिए और अब उसकी हत्या भी हो गई| इस नृशंस कांड के लिए आखिर किसे जिम्मेदार ठहराया जाए?

हत्या और मृत्युदंड : शहीद सरबजीत और आतंकी कसाब

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- कविता वाचक्नवी


सरबजीत की पाकिस्तान की जेल में कर दी गई हत्या के बाद  देश और देश की सरकार के कारिन्दे पहले से तैयार कर रखे गए बयान पढ़ने में मशगूल हैं। जो लोग कसाब को संवैधानिक ढंग से दिए गए दण्ड पर विलाप कर रहे थे, भारत को कोस रहे थे, वे कविता-कहानी और अपनी पुस्तकों और प्रकाशन के आयोजन की चर्चाओं में मस्त व्यस्त हैं। 



चीन की अशोभनीय पैंतरेबाजियाँ

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- डॉ. वेदप्रताप वैदिक 



चीन गज़ब का पैंतरेबाज मुल्क है| एक ओर वह भव्य और गरिमामय महाशक्ति का आचरण करते हुए दिखाई देना चाहता है और दूसरी ओर वह ओछी छेड़खानियों से बाज नहीं आता| अभी 15 अप्रैल को उसकी फौज ने सीमांत के दौलत बेग ओल्डी क्षेत्र में घुसकर अपने तंबू खड़े कर दिए हैं| वे ​नियंत्रण-रेखा के पार भारतीय सीमा में 10 किमी तक अंदर घुस आए हैं| लगभग ऐसा ही उन्होंने जून 1986 में सोमदोरोंग चू में किया था|वहाँ से उन्होंने 1995 में अपने आप वापसी करके भारत को प्रसन्न कर दिया था|

सिविल सेवा परीक्षा : कुछ और सुझाव

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सिविल सेवा परीक्षा : कुछ और सुझाव
मृणालिनी शर्मा



इसे भारतीय लोकतंत्र की हालिया ऐतिहासिक उपलब्धि ही कहा जाएगा जब एक सप्‍ताह के अंदर सरकार ने संसद में की गई घोषणा के अनुरूप अपना फैसला वापिस ले लिया । यानि सिविल सेवा की मुख्‍य परीक्षा में अंग्रेजी आगे नहीं रहेगी, बल्कि बराबर रहेगी । अच्‍छा होता यदि सरकार एक कदम और आगे जाकर प्रथम चरण की प्रिलिमिनरी परीक्षा से भी अंग्रेजी का हिस्‍सा हटा देती । अखबारों में छनकर आ रही सूचनाओं के अनुसार संक्षेप में सिविल सेवा परीक्षा की जिन अधिसूचनाओं को रद्द किया गया है, वे हैं :-

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से तीन नये अतिथि लेखक जुड़े

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महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से जुड़े तीन नये अतिथि लेखक

कवि ऋतुराज, कवि-उपन्यासकार विनोद कुमार शुक्ल तथा साठोत्तरी कथा पीढ़ी के प्रमुख स्तंभ दूधनाथ सिंह महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के तीन नये अतिथि लेखक होंगे। प्रसिद्ध कथाकार व कथालोचक विजय मोहन सिंह तथा कथाकार संजीव का कार्यकाल समाप्त होने पर कुलपति विभूतिनायायण राय ने ये नियुक्तियाँ की हैं ।

कविता के वाद-प्रतिवाद और तथाकथित गुटबंदी परक आंदोलनों से दूर ऋतुराज सातवें दशक के एक विरल कवि हैं। कविता की प्रखर राजनैतिकता के दौर में उन्होंने अपनी काव्यभाषा के लिये एक नितांत निजी मुहावरा रचा और अँगीठी में सुलगती आग की तरह उनकी कविताएँ आज भी नये कवियों के लिए अपरिहार्य बनी हुई हैं।


अपने उपन्यास दीवार में खिड़की रहती थी के लिये साहित्य अकादमी से पुरस्कृत कवि -उपन्यासकार विनोद कुमार शुक्ल सही मायने में हिंदी के जीनियस रचनाकार हैं। नौकर की कमीज,दीवार में खिड़की रहती थी और खिलेगा तो देखेंगे नाम से उनके तीन उपन्यासों की त्रयी ने एक तरह से भारतीय निम्न मध्यवर्ग का एक आधुनिक महाकाव्यात्मक शास्त्र रचा है । शब्द और उनके अर्थो की विच्छिन्नता के इस दौर में उनकी कवितायें शब्दों में उनके अर्थों की वापसी का जीवन्त दस्तावेज हैं।


साठोत्तरी कथा पीढ़ी के सर्वाधिक तेजस्वी लेखकों में से एक कथाकार दूधनाथ सिंह हिंदी के उन गिने चुने लेखको में हैं जिनकी प्रतिभा एक विधा के दायरे में नही बंध सकी। अपनी प्रमुख पहचान कहानियों के अलावा निराला एवं महादेवी पर उनका आलोचनात्मक कार्य,लौट आ ओ धार! जैसा संस्मरण और यमगाथा जैसा नाटक हिंदी साहित्य की उपलब्धियाँ हैं ।

हिंदी के इन विलक्षण रचनाकारों की एक साथ विश्वविद्यालय में उपस्थिति से परिसर का रचनात्मक वातावरण एक दस्तावेजी महत्व की तरह का होगा ,ऐसा भरोसा कुलपति ने जताया है।


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