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संभव है आप भी मेरी तरह भावुक हो कर फूट फूट कर रो पड़ें

आप को अत्यंत सुखद आश्चर्य हो सकता है अथवा संभव है कि आप भी मेरी तरह भावुक हो कर फूट फूट कर रो पड़ें कि इस पाकिस्तानी चैनल के प्रस्तोता ने लाल बहादुर शास्त्री के जीवन की सादगी, ईमानदारी, त्याग, आदर्शों और जीवन पर एक समूचा कार्यक्रम ही समर्पित कर दिया ( आगे स्वयं देखें )।




आज जिस युग में भारत में उनके उच्चादर्शों और महानता को तो क्या, लोग उन्हें तक बिसार बैठे हैं,  जिस देश का इतना पतन हो चुका कि नई पीढ़ी और युवक युवतियाँ तो क्या 70 से 85 वर्ष की आयु तक के लोग महापुरुष के रूप में अमिताभ बच्चन के तथाकथित महापुरुषत्व (?) को स्थापित करने के लिए एकेडेमिक मंचों पर शास्त्रार्थ करते अपने वैचारिक व श्रेष्ठ होने के प्रमाण देते हैं;  और जिस देश के नेतृत्व, शिक्षा, लेखकीय समाज, धर्म गुरुओं, से लेकर हर कोने किनारे तक चारित्रिक पतन का  कोई ओर न छोर, जिस देश की  भयावह दुर्दशा पर देश का हर सच्चा नायक कराह कराह उठा हो, उस देश से अपने वास्तविक  महापुरुषों को याद रख, पुण्य स्मरण  की आशा करना भी बड़ी भूल ही है। 

स्वतंत्र भारत के लगभग एकमात्र रोल मॉडल नेता शास्त्री जी के प्रति पाकिस्तानी चैनल पर ये उद्गार देख कर मैं बरबस घंटाभर तक रोती रही हूँ। 

इस कार्यक्रम की संकल्पना जिस-जिस ने भी रची, उस प्रत्येक व्यक्ति के लिए मेरे हृदय से लाख लाख धन्यवाद  और शुभकामनाएँ बरबस ही निकल पड़ी हैं। काश ! ........  









संभव है आप भी मेरी तरह भावुक हो कर फूट फूट कर रो पड़ें संभव है आप भी मेरी तरह भावुक हो कर फूट फूट कर रो पड़ें Reviewed by Kavita Vachaknavee on Sunday, October 16, 2011 Rating: 5

4 comments:

  1. एक प्रेरणास्पद व्यक्तित्व की सादगी अद्वितीय है। काश हमारे आज के नेता उनसे कुछ सीख पाते। इस विडियो को सामने रखने के लिये आपका हार्दिक धन्यवाद!

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  2. मैं समझता था कि सिर्फ मैं ही पागल हूँ जो देश की गरिमा और समाज की नैतिकता से जुड़ी हर बात पर रो देता हूँ। लेकिन आपकी इस पोस्ट में आपके कथन ने मेरा यह भ्रम तोड़ दिया। यह बहुत-कुछ सोचने को मज़बूर कर देने वाली वीडियो आपने प्रस्तुत की है। भाई जावेद के ये शब्द कि--…अगर सियासतदन हस्सास हों, ये दर्दे-दिल रखते हों, तो इनके लिए पब्लिक ओपिनियन या आवामी इत्तिजाज़ हार्ट-अटैक की हैसियत अख्तियार कर लेता है।---हमारे आज के राजनेताओं के कानों तक अवश्य पहुँचने चाहिएँ।

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  3. sachmuch....dil bhar aayaa. chhote kad ka yah badaa aadami aaj bhi hamen sabak sikhataa rahataa hai. aapne ek pavirtra kaam kiyaa is vedio ka link de kar...dhanywad

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  4. shayad tabhi us smy hum netaon ki ijjat karte the aaj darte hain aur pith pichhe bhala bura kahte hain .pahle to aapka dhnyavad ki aapne ye vedio dikhaya .bharat ki hoke bhi mujhe itna sab nahi pata tha .sach kaha aapne aansu nikle yahi soch ke ke kash aaj bhi koi ek aesa hota .
    saader
    rachana

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आपकी सार्थक प्रतिक्रिया मूल्यवान् है। ऐसी सार्थक प्रतिक्रियाएँ लक्ष्य की पूर्णता में तो सहभागी होंगी ही,लेखकों को बल भी प्रदान करेंगी।। आभार!

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