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इस ( बे ) हाल में जीना है .....?

इस  ( बे ) हाल में जीना है .....? 



 व्यथा-कथा ही कुछ ऐसी है कि  मैं तो अपने आँसू रोक नहीं पाई, जिनके जी कड़े हों वे अपने आँसू रोक सकें तो आजमा लें .....|

हमें आईना दिखाता है हमारा समाज !  कुछ सीख सकें तो बात है !!






इस ( बे ) हाल में जीना है .....? इस  ( बे ) हाल में जीना है .....? Reviewed by Kavita Vachaknavee on Saturday, June 18, 2011 Rating: 5

4 comments:

  1. उफ्फ!! धिक्कार है ऐसी औलादों पर...

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  2. मान गये माँ की ममता को एक साल में दो बार बेटे मिलते है वह भी ईद के दिन आगे कुछ नहीं .

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  3. औलाद तो जैसी है, माँ का दिल देखिये कि औलाद से कोई शिकवा शिकायत नही ।

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आपकी सार्थक प्रतिक्रिया मूल्यवान् है। ऐसी सार्थक प्रतिक्रियाएँ लक्ष्य की पूर्णता में तो सहभागी होंगी ही,लेखकों को बल भी प्रदान करेंगी।। आभार!

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