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महारानी झाँसी के चित्र से छेड़छाड़ : पत्रकारिता की शर्म





आज १७ जून को महारानी लक्ष्मीबाई बलिदान दिवस पर विशेष


झाँसी की रानी के नकली चित्र का प्रचार  




आजकल झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई के असली चित्र के नाम पर नेट पर एक अजीबोगरीब चित्र का प्रचार प्रसार किया जा रहा है | यह चित्र प्रथम दृष्टि से देखते ही उक्त महिला के झाँसी की रानी न होने की पुष्टि करता है | थोड़ी भी समझबूझ वाला व्यक्ति जो इतिहास, तत्संबंधी पहरावे, चित्र और चरित्र का तादात्म्य आदि  ..... जैसी कुछ मौलिक बातों की सूझ रखता होगा वह बिना एक भी क्षण गँवाए पहचान जाएगा कि महारानी  झाँसी का वास्तविक चित्र वह हो ही नहीं सकता |  

 यह चित्र कतई और कतई झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई का नहीं है | यह किसी समाचार पत्र के मूर्ख पत्रकार की मूर्खता से किसी ज़माने के ब्लैक एंड वाईट चित्र की भरती- भर  है, बस !


 झाँसी की रानी का केवल एक चित्र उपलब्ध है जिसे कोलकाता में रहने वाले अंग्रेज फोटोग्राफर जॉन स्टोन एंड हॉटमैन ने १८५० में खींचा था और वह चित्र अहमदाबाद निवासी चित्रकार अंबालाल के संग्रह में संकलित है | मेरे फेसबुक के एक एल्बम "बलिदान दिवस पर" में भी  वह  २३ मार्च २०१० से संकलित है | 


अपनी ओर से मैं जगह जगह पर उस गलत व झूठे  चित्र पर टिप्पणी कर यथासंभव झूठ व इतिहास से छेड़छाड़  का विरोध दर्ज करवाती हूँ किन्तु मेरे अकेले भर से समाधान होना पर्याप्त नहीं है | हम सभी का यह नैतिक दायित्व है कि जहाँ कहीं भी गलत व झूठे  चित्र को देखें वहाँ उसका विरोध करें व उसे हटाने की माँग भी | 

कृपया गलत व झूठे चित्र को प्रचारित कर झूठ को फैलाने में सहभागी न बनें |

 अधिक नहीं तो कम से कम इतनी कृतघ्नता से तो हम बच ही सकते हैं |



यह है महारानी का एकमात्र वास्तविक चित्र 




                                                                    ---------------




और यह है असली चित्र के नाम से स्थान स्थान पर प्रकाशित प्रचारित
 एकदम झूठा व नकली चित्र 



-    (डॉ.) कविता वाचक्नवी

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अद्यतन (अपडेट @ 4 नवंबर 2011)

ग्वालियर से प्रकाशित होने वाली  पत्रिका `मत' के संपादक अनिल शिवहरे जी का एक संदेश मिला -

आदरणीय दीदी, आपकी रानी लक्ष्मीबाई के असली और नकली फोटो से सम्बंधित पोस्ट पढ़ी. आपने जो लेख के अंत में जनमानस से नकली फोटो के विरोध का निवेदन किया है मुझे बहुत अच्छा लगा. मैं मूलतः फोटो पत्रकार हूँ और पिछले सात वर्षों से भारत मध्यप्रदेश के ग्वालियर जिले से एक मासिक समाचार पत्रिका "मत" का प्रकाशन बहुत ही सीमित संसाधनों में कर रहा हूँ. हमारा अधिक से अधिक प्रयास रहता है कि पाठकों तक सच्ची और अच्छी सामग्री पहूँच सके ताकि नई पीढ़ी को हमारी पौराणिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं साहित्यिक परंपराओं से रूबरू होने का मौका मिल सके। इसी को देखकर कड़ी प्रतिस्पर्धा और बाजारवाद के चलते "मत" पत्रिका में कुछ पृष्ठ साहित्य के लिए आरक्षित रखे जाते हैं जिनमें देश के और अंचल के साहित्यकारों की प्रमुख रचनाओं को जन हित में प्रकाशित किया जाता है। "मत" पत्रिका के शीघ्र प्रकाशित होने वाले अंक में रानी लक्ष्मीबाई पर आधारित सुभद्राकुमारी चौहान की कविता "खूब लड़ी मर्दानी..." को बिना काट-छाट के पूर्ण कविता को हाल ही में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा स्कूली पाठ्यक्रम में पुनः शामिल करने के आदेश दिये हैं जिसे पूर्व में किसी षड्यंत्र के तहत कविता की कुछ लाइनों को हटाकर पाठ्यक्रम से गायब कर दिया गया था। जिसकी जाँच के निर्देश भी दिये गए हैं से संबंधित एक आलेख प्रकाशित किया जा रहा है। संयोग से आपकी पोस्ट पढ़ने का मिली, चूंकि वीरांगना झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई का अंग्रजों से लड़ते-लड़ते बलिदान ग्वालियर में ही हुआ था जिनकी यहाँ पर समाधी और घोड़े पर सवार आदमकद प्रतिमा स्थापित है साथ ही इसी प्रतिमा स्थल के ठीक पीछे महंत गंगादास जी की शाला है यह वही गंगादास जी महाराज थे जिन्होंने घायल महारानी के आग्रह पर दम तोड़ने के पश्चात उन्हें अग्नि को समर्पित किया था। वहीं ग्वालियर के म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन के म्यूजियम में वीरांगना के हथियार,युद्ध पौशाकें ताथा महारानी का लिखा गया ऐतिहासिक पत्र जो बीबीसी की पोस्ट पर भी उपलब्ध है, यह सभी यहाँ म्यूजियम में मौजूद हैं जिन्हें वीरांगना के बलिदान दिवस पर आयोजित होने वाले दो दिवसीय बलिदान मेले के अवसर पर जनता के लिए प्रदर्शनी के रूप में बाहर निकाले जाते हैं। यह बलिदान मेला पिछले गत दस वर्षों से ग्वालियर के तत्कालीन सांसद जयभानसिंह पवैया और उनकी समीति द्वारा आयोजित किया जाता है जिसमें कई प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रम और राष्ट्रीय स्तर का वीरांगना अवार्ड दिया जाता है साथ ही कार्यक्रम का समापन एक विराट अखिलभारतीय कवि सम्मेलन से होता है। ग्वालियर वासी सहित संपूर्ण मध्यप्रदेश एवं झाँसी और बुंदेलखंड अंचल के लोगों के लिए महारानी लक्ष्मीबाई से जुड़े कोई भी तथ्य एवं प्रमाण उनके जीवन में बहुत महत्व रखते हैं इसलिए आपसे मेरा अनुरोध है कि आपकी अनुमति हो तो हम "मत" पत्रिका के इसी अंक में वीरांगना के असली और नकली फोटो और संबंधित आलेख को प्रकाशित करें ताकि अधिक से अधिक लोगों को इसकी जानकारी मिल सके साथ ही यह भी बताने की कृपा करें कि जो नकली फोटो बताया गया है वह भोपाल के किस अखबार में किस वर्ष में प्रकाशित हुआ था। कृपया अपना ईमेल आइडी एवं पोस्टल ऐड्रेस देने की कृपा भी करें। आपका छोटा भाई अनिल शिवहरे संपादक (मत समाचार पत्रिका)

उनकी सदाशयतावश यह लेख `मत' के  अगस्त 2011 के अंक में प्रकाशित हुआ। उसकी छाया प्रति यह है - 


इस बीच यू ट्यूब पर यह वीडियो भी हाथ लग गया है, देखें
महारानी झाँसी के चित्र से छेड़छाड़ : पत्रकारिता की शर्म महारानी झाँसी के चित्र से छेड़छाड़  : पत्रकारिता की शर्म Reviewed by Kavita Vachaknavee on Friday, June 17, 2011 Rating: 5

26 comments:

  1. सही कहा आपने। अनजाने में भी हम सब को ऐसे दुष्प्रचार में शामिल होने से बचना चाहिये। नीचे वाला झूठा चित्र कालखण्ड के अनुसार खुद ही नकली मालूम पड़ता है, यह किसी हीरोइन आदि का मालूम पड़ता है।

    झाँसी रानी का असली चित्र साझा करने के लिये आभार। इसे विकिपीडिया पर लगाना चाहिये।

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  2. सचमुच खेद का विषय है...
    आपकी आभारी हूँ कविता जी इस जानकारी के लियें...


    सस्नेह
    गीता

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  3. एक से एक अधम व्यक्ति हैं जो सफ़ेद झूठ बोलने से भी नहीं पीछे रहते। हद है।

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  4. यही तो तमाशा है, भारत के पत्रकारों से इतनी समझदारी की आशा भी नहीं की जा सकती कि वे आँख - कान खोल कर चीजों को आगे बढ़ाएँ | सब के सब अंधाधुंध इस तमाशे को प्रचारित करने में लगे हैं.

    आज ( व आज से पूर्व) नेट पर हजारों-हजार लोगों ने इसी चित्र को नमन कर कर के अपने श्रद्धा सुमन चढ़ाए | हद्द है |

    सच है कि मूर्खता की भी पराकाष्ठा नहीं होती |

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  5. .कविता जी, क्या यह बेहतर न होगा कि हम सभी नेटगामी किसी ऎसे सँयुक्त मुहिम के हिस्सेदार बन कर कार्य करें, जिससे कि हमारी आवाज़ भी सुनी जा सके ? पर वही चिरकालीन सवाल... बिल्ली के गले यानि ऎसे मुहिम की शुरुआत कौन करे ?

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  6. asli chitr naari blog par aur akankshya yadav kae blog par takreeban do saal sae haen
    nakli chitr pehli baar daekha

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  7. ईमेल से प्राप्त -

    From : B Balaji



    यह तो सानिया मिर्जा या कोई सिने तारिका के चेहरे जैसा लगता है. यह चित्र 'झाँसी की रानी लक्ष्मी बाई' का तो नहीं हो सकता. लगता है आज के जमाने के किसी फोटो ग्राफर ने उस काल के फोटो ग्राफर का हवाला देकर नाम कमाने का सस्ता और गिरा हुआ उपाय किया है.

    लोग नाम कमाने के लिए अपने ईमान तक को भूल जाते हैं. राष्ट्रीयता की भावना तो दूर की बात है. उन्हें तो बस पैसा और नाम मिलना चाहिए, वे अपनी इज्जत बेचने में भी विचार नहीं करते.

    रानी लक्ष्मी बाई जैसे व्यक्तित्व का नाम किसी भी मुनाफ़ाखोर को मुनाफ़ा कमाने का एक माध्यम बन जाता है. मेरे विचार से ऐसे लोगों को कड़ी सजा मिलनी ही चाहिए.
    balajib18@yahoo.com

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  8. रचना जी टिप्पणी के लिए धन्यवाद |

    मैंने ऊपर लिखा ही है कि मैंने २४ मार्च २०१० को यह चित्र अपने फेसबुक के एल्बम " बलिदान दिवस पर " में संकलित, सुरक्षित व प्रकाशित किया था | उस के पश्चात् जाने कैसे, किसने व क्यों इसके साथ छेडछाड की |

    आश्चर्य है कि नेट पर रहते हुए आप गलत चित्र को पहली बार देख रही हैं, जबकि वह कटिंग स्वयं इस बात का प्रमाण है कि उसे समाचारपत्रों तक ने छापा | अतः निराकरण की बात का सन्दर्भ कोई अतिशयोक्ति नहीं है |

    नारी ब्लॉग पर इस चित्र का उपयोग १८ जून २०१० ( 2 नहीं अपितु 1 वर्ष पूर्व ) किया गया है ( http://indianwomanhasarrived.blogspot.com/2010/06/blog-post_18.html ) उक्त पोस्ट में दिए सभी लिंक्स पर यह १८ जून २०१० को प्रकाशित हुई |

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  9. आदरणीय डॉ. आनंद कुमार जी

    टिप्पणी के लिए आभारी हूँ |
    वस्तुतः मुहिम से पहले उसकी एक कार्ययोजना बनानी पड़ेगी | उसके उद्देश्यों, मंतव्यों, गठन के कारकों आदि पर विचार आवश्यक है | तदुपरांत कार्ययोजना फिर उसके निष्पादन में सहभागी बना सकने वाले लोगों से संपर्क व सहमति प्राप्त करना | साथ ही कितने व कैसे संसाधन आवश्यक होंगे इसका भी खाका तैयार करना होगा |

    शुरुआत तो बस ऐसे ही हो जाएगी |

    आपकी इस आशय की टिप्पणी ही को शुरुआत क्यों न मान लिया जाए !

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  10. pehli baar hi yae galat chitr daekhaa kavita isii liyae likha aur khud bhi achambhit hi hun

    sahii chitr kayee news paper mae aur patrikaa mae bahut baar daekhaa thaa aur tab hi naari blog par dala thaa

    print media jo naa karey so kam haen

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  11. रानी झाँसी के छद्म चित्र से नकाब उठाकर अपने सराहनीय कार्य किया है. असली चित्र सभी देशप्रेमी चिट्ठाकार अपने-अपने चिट्ठों पर लगायें तो अंतर्जाल के अधिकांश पाठक इससे परिचित हो जायेंगे.
    आपको साधुवाद....

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  12. @ डॉ. अमर कुमार जी,

    क्षमा करें, मैं आपका नाम गलत लिख गई |

    :(

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  13. कविता जी, महारानी लक्ष्मीबाई जी के नीचे वाले फर्जी चित्र को बड़ा करके देखने पर मैं समझ गया कि वह चित्र अखबार ने नहीं छापा है, या कम-से-कम उस खबर में मूलतः वह चित्र नहीं था. कागज़ की कटिंग स्कैनिंग में कागज़ मुड़ा तुड़ा सा है लेकिन उसपर लगा चित्र अच्छी हालत में है इससे यह प्रतीत होता है कि किसी ने कागज़ की कटिंग की कम्प्युटर फ़ाइल में फर्जी चित्र पेस्ट कर दिया है. एक बात और, फर्जी चित्र में नीचे किसी मस्ती-मज़ा वेबसाईट का पता लिखा है जो इस बात को सिद्ध करता है कि चित्र लगानेवाले का उद्देश्य केवल अपनी वेबसाईट का प्रचार करना ही रहा है.

    साल भर पहले मैंने एक ब्लौग पर जब महारानी के फर्जी चित्र को असली बताने का विरोध किया तो लोगों ने मुझे समझाइश दी कि मैं खुद को ज्यादा अकलमंद साबित नहीं करूं. यहाँ बहुसंख्यक ऐसे ही हैं.

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  14. aapne bahut hi sarahniye kaam kiya .
    me sabhi ko ye batungi.
    itna bada khilvad bahut galat hai
    rachana

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  15. dhnyvad mujhe kuch nya janne aur dekhne ko mila

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  16. मैंने जब पहली बार देखा था तब संदेह हुआ था लेकिन इस चित्र पर अधिक ध्यान से नहीं सोचा। अब तो साफ है नीचे की तस्वीर नकली है। क्योंकि 1850 के समय में एक तो फोटो अधिक नहीं खिंचे जाते थे और दूसरा इस तरह बाल फैलाकर अभिनेत्री स्टाइल में तो एक प्रतिशत भी उम्मीद नहीं है।

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  17. सुबह को धमाके, रात को झटके क्यों है !
    या खुदा मेरी दिल्ली में ये खटके क्यों है!!
    हम तो तेरे साये में जीने की दुआ मांगे,
    फिर भी तेरे बन्दे राह से भटके क्यों है!
    माफ़ कर दे मौला हमारे गुनाहों को अब,
    मेरी फरियाद के सितारे यूँ अटके क्यों है!
    न घर से निकल सकते,न बाहर जा सकते,
    इस कदर सब लोग बीच में लटके क्यों है!!

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  18. Aaj mujhe bhi apni murkhta ka gyaan ho gaya. . . Jaldbazi me maine kai logo ko wahi ferzi chitra dikha diya :(
    bahut sharminda hoon . . .

    Jald hi sudhar lunga ye bhool. . Ujjain ke vyast chaurahe ''Madhav Nagar Tower'' par in dono chitra ke sath apni appeal wale bade bade flax board rakhwane wala hoon.

    Thanx for introducing with truth.

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  19. विकास श्रीवास्तव जी,

    आपने इस लेख को पढ़कर सच्चाई को जन जन तक प्रचारीत प्रसारीत करने के लिए जो संकल्प लिया है, उसके विषय में जान कर प्रसन्नता हुई। आपका प्रयास प्रशंसनीय है। धन्यवाद और शुभकामनाएँ।

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  20. पिछले एक साल से मैं भी ऑरकुट से लेकर फेसबुक तक मूर्ख और नासमझ लोगों का विरोध करता रहा हूँ...
    अभी दो चार दिन पहले ऐसे ही किसी मूर्ख मित्र से विवाद इतना लंबा हो गया कि अब मैंने एक अभियान चलाने का फैसला लिया है...
    भारत के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले क्रांतिकारियों को उचित सम्मान मिलना चाहिए...
    उनकी वास्तविक तस्वीरों को पूजा जाना चाहिए ना कि अविश्वसनीय और झूठी तस्वीरों को...
    रानी झांसी के सम्मान के लिए आपके इस लिख के लिए आभार...
    'राष्ट्र सर्वप्रथम सर्वोपरि'
    वन्दे मातरम्...
    जय हिंद... जय भारत...

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  21. फेसबुक पर एक सज्जन द्वारा पोस्ट के जरिये मैं इस ब्लॉग पहुँच पाया और तभी जान सका की ज्हुथी और सच्ची तस्वीर में क्या अंतर है.........धन्यवाद लोगो की भ्रान्ति दूर करने के लिए

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  22. नकली चित्र १०० प्रतिशत नकली है. आपने सही चित्र प्रस्तुत किया है.

    आभार

    रूपसिंह चन्देल

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  23. This comment has been removed by the author.

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  24. Regards... and the video is not working... please check it... Thanks and Regards for suck kind of information... great...

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  25. भारत की प्राचीन नस्ल में, कथा पुराण जैसी ही सर्बो भवन्तु सुखिना की प्रेरणा सदा ही प्रभावित रही है..? भारत की प्राचीन नस्ल में, कथा पुराण जैसी ही सर्बो भवन्तु सुखिना की प्रेरणा सदा ही प्रभावित रही है..?

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आपकी सार्थक प्रतिक्रिया मूल्यवान् है। ऐसी सार्थक प्रतिक्रियाएँ लक्ष्य की पूर्णता में तो सहभागी होंगी ही,लेखकों को बल भी प्रदान करेंगी।। आभार!

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