इस प्रेम पर विह्वल ही हो सकते हैं

इस प्रेम पर विह्वल ही हो सकते हैं 

यह एक ऐसी कथा है, जो बरसों चलती हैं और प्रेम का वह रूप दिखाती है, जो दुर्लभ किन्तु कितना सहज व सरल है.

 और विस्तार से जानने की इच्छा रखने वालों के लिए यूट्यूब व नेट पर इसके विषय में हजारों पन्ने व वीडियो और मिल जाएँगे. यहाँ तक कि इस विषय में पुस्तक तक लिखनी पड़ीं


3 comments:

  1. नमस्कार,

    हिन्दी ब्लॉगिंग के पास आज सब कुछ है, केवल एक कमी है, Erotica (काम साहित्य) का कोई ब्लॉग नहीं है, अपनी सीमित योग्यता से इस कमी को दूर करने का क्षुद्र प्रयास किया है मैंने, अपने ब्लॉग बस काम ही काम... Erotica in Hindi. के माध्यम से।

    समय मिले और मूड करे तो अवश्य देखियेगा:-

    टिल्लू की मम्मी

    टिल्लू की मम्मी -२

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  2. Easily, the article is in reality the sweetest on this deserving topic. I fit in with your conclusions and will eagerly look forward to your future updates. Just saying thanks will not just be adequate, for the great lucidity in your writing. I will directly grab your rss feed to stay abreast of any updates.Thanks
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  3. नववर्ष की मंगल कामनाएं स्वीकार करें । आपको सपरिवार मंगल कामनाएं अर्पण करता हूँ ,स्वीकार हों । - आशुतोष मिश्र

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आपकी सार्थक प्रतिक्रिया मूल्यवान् है। ऐसी सार्थक प्रतिक्रियाएँ लक्ष्य की पूर्णता में तो सहभागी होंगी ही,लेखकों को बल भी प्रदान करेंगी।। आभार!

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