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झाँसी की रानी का ऐतिहासिक पत्र मिला

झाँसी की रानी का ऐतिहासिक पत्र मिला 







भारत में ब्रिटिश शासन के विरुद्ध  हुए 1857 के विद्रोह में अहम भूमिका निभाने वाली झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई की एक महत्वपूर्ण चिट्ठी लंदन में ब्रिटिश लाइब्रेरी के आर्काइव्स में मिली हैं.


झाँसी की रानी ने 1857 के विद्रोह से कुछ ही देर पहले यह पत्र ईस्ट इंडिया कंपनी के गवर्नर जनरल लॉर्ड डलहौज़ी को लिखा था.

लंदन में आजकल विक्टोरिया एंड एल्बर्ट म्यूज़ियम की महाराजा प्रदर्शनी की रिसर्च क्यूरेटर दीपिका अहलावत ने इस पत्र के बारे में प्रकाश डाला है.


लॉर्ड डलहौज़ी को लिखा पत्र

दीपिका अहलावत का कहना है, " ये चिट्ठी उन दस्तावेज़ों का हिस्सा है जो बॉरिंग कलेशन के नाम से जाने जाते हैं. ये दस्तावेज़ एक ब्रितानी अधिकारी - लेविन बेंथम बॉरिंग के नाम से जाने जाते हैं जिन्होंने भारत के राजाओं-महाराजाओं के बारे में दस्तावेज़, तस्वीरें और अन्य चीज़े एकत्र की थीं."


झाँसी की रानी के इस पत्र में उस रात का विवरण है जब उनके पति की मृत्यु हुई थी.


लक्ष्मीबाई ने पत्र में लिखा है कि डॉक्ट्रिन ऑफ़ लैप्स के डर से उनके पति ने विधिवत ढंग से पुत्र को गोद लिया था ताकि उसे झाँसी का अगला राजा स्वीकार किया जाए लेकिन लॉर्ड डलहौज़ी ने इसे स्वीकार नहीं किया.


वर्ष 1857 में भारत में ब्रितानी शासन के ख़िलाफ़ भड़के विद्रोह में झाँसी की रानी ने जंग के मैदान में ख़ुद अपने सैनिकों का नेतृत्व किया था और लड़ते-लड़ते वीरगति को प्राप्त हुई थीं |



दीपिका अहलावत बताती हैं कि वो तो अपने शोध के सिलसिले में ब्रिटिश लाइब्रेरी में कुछ खोज रही थीं कि अचानक रानी लक्ष्मी बाई की ये चिट्ठी हाथ लग गई. फिर तो भारी प्रयास करके इस चिट्ठी को हासिल किया गया और इसे विक्टोरिया एंड एलबर्ट म्यूज़ियम में महाराजा नामक प्रदर्शनी में प्रदर्शित भी किया गया है.


रानी लक्ष्मी बाई की यह चिट्ठी फ़ारसी और उर्दू में मिश्रित रूप से लिखी हुई है. साथ ही कुछ अन्य भाषाओं के शब्द भी इस्तेमाल किए गए हैं.


दीपिका अहलावत ने इस चिट्ठी का अनुवाद अंग्रेज़ी में करने की कोशिश की जिसमें उनकी मदद की फ़रीबा थॉम्पसन ने. पत्र का हिंदी रूपांतरण हमने यहाँ प्रस्तुत  करने की कोशिश की है...




"अंग्रेज़ सरकार, जो राव राम चंद और उनके उत्तराधिकारियों की झाँसी सरकार का स्थायित्व बनाए रखना चाहती है, जो सरकार विधाता के आशीर्वाद से अस्तित्व में है, वो इस बात पर सहमत है कि कुलीन लोगों का नाम और रिसायत बरक़रार रखा जाए. इसीलिए जैसाकि पहले भी कहा जा चुका है, संधि के अंतर्गत किसी रियासत के अस्तित्व और निरंतरता की व्यवस्था की गई थी. वो व्यवस्था ये है कि अगर किसी शासक का कोई पुत्र ना हो तो दत्तक पुत्र उत्तराधिकारी माना जाएगा, और भारत में ये एक प्रथा भी है कि अगर कोई पुत्र नहीं होता है तो दत्तक पुत्र भी अंतिम समय में जल पिला सकता है, उसका यह कार्य रक्त पुत्र की ही तरह समझा जाएगा, ऐसा ही शास्त्रों में भी लिखा है.  

इसलिए शिवराम ने 19 नवंबर 1853 को रात के समय दीवान लाहौरी मल... और लाला फ़तेह चंद नामक अधिकारियों को तलब किया और कहा कि बीमारी में किसी की भी दी हुई दवा कोई असर नहीं दिखा रही है. इसलिए उनका नाम और रियासत बरक़रार रहे, इसलिए शास्त्री से कहा जाए कि वह वे राजा के गोत्र से ही एक ऐसा लड़का तलाश करें जो गोद लेने के लिए उपयुक्त हो. आदेशानुसार राम चंदर बाबा साहिब शास्त्री को भी बुलाया गया. साथ ही गोत्र के कुछ लड़के भी बुलाए गए जिनमें बासु देव का पुत्र आनंद राव भी और उसे गोद लेने के लिए उपयुक्त होने पर सहमति बनी. शिवराम ने गोद लेने की रस्म पूरी करने के लिए शास्त्री को आदेश दिया और सुबह की बेला में पुरोहित राव ने मंत्रोच्चारण करके रस्म पूरी की. आनंद राव के पिता बासुदेव ने शिवराम के हाथों पर जल छिड़का और शास्त्रों के अनुसार अन्य रस्में पूरी कीं और गोद लिए गए बच्चे का नाम दामोदर राव गंगाधर रखा."

सौजन्य : बीबीसी


इस प्रकार झांसी की रानी लक्ष्मीबाई से संबन्धित दस्तावेजों में उनकी मुहर, कुछ पत्र, निमंत्रण पत्र आदि उपलब्ध हैं। उन्हें पुनः  एक बार देखें -

रानी द्वारा युद्धकाल में लिखा गया पत्र 


रानी द्वारा युद्धकाल में लिखा गया पत्र 



झाँसी की रानी की आधिकारिक मुहर



लक्ष्मीबाई (मनु ) का झांसी के महाराजा के साथ विवाह का निमंत्रणपत्र 



लॉर्ड डल्हौज़ी को लिखा पत्र


झाँसी की रानी का ऐतिहासिक पत्र मिला झाँसी की रानी का ऐतिहासिक पत्र मिला Reviewed by Kavita Vachaknavee on Wednesday, November 18, 2009 Rating: 5

35 comments:

  1. खबर पढ़ी तो थी... आपने चित्र भी दिखा दिया कविता मैम.... बहुत बहुत आभार
    जय हिंद...

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  2. अच्छी जानकारी। धन्यवाद।

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  3. बहुत ही अच्‍छी ऐतिहासिक तथ्‍य की ओर इंगित करती पोस्‍ट, बहुत बहुत धन्‍यवाद

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  4. एक अमूल्य धरोहर ! जानकारी का आभार ।

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  5. आभार इस महत्पूर्ण जानकारी के लिए
    regards

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  6. इतनी महत्‍वपूर्ण जानकारी से हमलोगों को अवगत कराने के लिए आपका धन्‍यवाद !!

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  7. बहुत बढ़िया ......बहुत बहुत आभार आपका !

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  8. एक महत्वपूर्ण जानकारी. ये हम सब के लिए धरोहर समान है.

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  9. AAPKI KHOJI PRATIBHAA KO SALAAM KARATAA HUN.

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  10. एक ऐतिहासिक दस्तावेज़ के दर्शन कराने के लिए आभार॥

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  11. आज १७ जून को महारानी लक्ष्मीबाई बलिदान दिवस पर विशेष प्रस्तुति के रूप में आप झाँसी की महारानी लक्ष्मीबाई के इस पत्र के अनुवाद के साथ ही एक अन्य लेख भी देख सकते हैं -

    महारानी झाँसी के चित्र से छेड़छाड़ : पत्रकारिता की शर्म http://hindibharat.blogspot.com/2011/06/blog-post_17.html

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    Replies
    1. namaskar kavita ji,aap mahatwpurn jaankariyaa uplabdh kara rahi hia ,bahut bahut dhanyavad,1857 ke sandrbh me tatkalin british adhikariyo aur sainiko ke bahut patr british archives me hay jinse us samay ke vastvik haalaat par roshni pad sakti hai,kya ye dastavez british govt ne net par bhi uplabdh karaye hai?yadi uplabdh hai to wevi d kya hay?

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  12. इस सार्थक जानकारी के लिए साधुवाद ।

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  13. aisi pyari-anamol jankari dee hai aapne ki romanch ho raha hai. dhanywad.

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  14. @Shrikaant(श्रीकांत जी),

    धन्यवाद।

    और हाँ, मेरा नाम अरुणा नहीं, अपितु कविता वाचक्नवी है।

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  15. I am delighted to see this historic record of Rani of Jhansi who has been always so close to our freedom ideals and bravery.

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  16. i am glad to found this information thanks for proding me a indian.

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  17. वाह ऐतहासिक और दुर्लभ चित्र है जिनका कोई जबाब नहीं ..बहुत बहुत आभार कविता जी इस प्रयास के लिये !

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  18. बहुत महत्‍वपूर्ण जानकारी हम तक पहुंचाने के लिए पूरी कड़ी का आभार।

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  19. आपने अहलावत जी के माध्यम से एक महत्वपूर्ण कार्य किया है. इंटरनेट पर प्रकाशित करने के लिए आपका आभार. मैं इस दस्तावेज को सुरक्षित रख रहा हूं. बिठूर को केन्द्र में रखकर १८५७ पर आधारित एक बृहद उपन्यास की योजना लंबे समय से चल रही. आपको यह जानकारी होगी कि नाना साहब और लक्ष्मी बाई का पालन बिठूर में साथ साथ हुआ था. वह उनकी मुंहबोली बहन थीं. और आपको यह भी पता होगा कि १८५७ की क्रान्ति की भूमिका नाना के मंत्री और सलाहकार अजीमुल्ला खां ने तैयार की थी. यदि अजीमुल्ला खां इस देश में पैदा न होते तो क्रान्ति होती ही नहीं भले ही मंगल पांडे ने कुछ भी क्यों न किया होता. क्रान्ति एक बहुत सोची-समझी योजना का परिणाम थी. इस पर प्रकाशन विभाग से १९९२ मेरी पुस्तक ’क्रान्तिदूत अजीमुल्ला खां’ में बताया गया है. लेकिन वह एक छोटी पुस्तक है. आपके ये दस्तावेज संभव है उपन्यास में मेरे काम आएं.

    रूपसिंह चन्देल

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  20. AAPKA HARDIK DHANAYWAAD.....JO AAPNE ITNI MAHATAVAPOORAN JAANKAARI SE AVGAT KARWAYA. YE JAANKAARI DESH KE PRATYEK SCHOOL AUE COLLEGE TAK PAHUNCHANI CHAHIYE VIDYARTHI IN SABHI BAATO KAA LAABH UTHA SAKEN....

    DHANAYWAAD SAHIT
    NARESH KUMAR SHARMA "CHAIRMAN"
    ALL INDIA STUDENTS WELFARE COUNCIL
    EDUCATIONLOVERS@GMAIL.COM

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  21. बहुत खूब। हम लोग जनवरी 2013 झाँसी जाने का इरादा है। जय हिंद।

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  22. आ. कविता जी, ये पत्र भारतीय इतिहास की अमूल्य धरोहर हैं. इन्हें देखना और पढ़ना मेरा सौभाग्य. यह अवसर प्रदान करने के लिये बहुत-बहुत धन्यवाद. रोमांचित हूँ मैं.

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  23. Thanks ( Aap ka Hardik Dahanywad es Jankari ka Liya..........

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  24. पोस्ट दिल को छू गयी.......कितने खुबसूरत जज्बात डाल दिए हैं आपने..........बहुत खूब
    बेह्तरीन अभिव्यक्ति .आपका ब्लॉग देखा मैने और नमन है आपको और बहुत ही सुन्दर शब्दों से सजाया गया है लिखते रहिये और कुछ अपने विचारो से हमें भी अवगत करवाते रहिये.

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  25. आज अचानक आपका ब्लॉग देखा, अतीव प्रसन्नता हुई कि आपने इसमें काफी महत्वपूर्ण जानकारी प्रस्तुत की हुई है. झांसी की रानी के हस्तलिखित दस्तावेजों ने तो चकित ही कर दिया. आपकी आवाज़ में भी बहुत कशिश है, बूढ़ी माँ की प्रस्तुति बहुत ही भावप्रवण और मार्मिक बन पडी है, आपका बहुत बहुत अभिनन्दन. सस्नेह-
    मंजु महिमा

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  26. Superb and awesome post.... got much more information after reading this.....
    good job!!!!!!!!

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  27. It is of great historical significance.
    It will enlighten many, who do not have access to
    such valuable material.

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आपकी सार्थक प्रतिक्रिया मूल्यवान् है। ऐसी सार्थक प्रतिक्रियाएँ लक्ष्य की पूर्णता में तो सहभागी होंगी ही,लेखकों को बल भी प्रदान करेंगी।। आभार!

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