२३ मार्च की चिट्ठाचर्चा : कही न जाए, का कहिए


२३ मार्च की चिट्ठाचर्चा : कही न जाए, का कहिए

कविता वाचक्नवी




कल
२३ मार्च बलिदान दिवस के दिन सोमवार होने के कारण चिट्ठाचर्चा का नियत दिन मेरा था,जिसके लिए मनोयोगपूर्वक तैयार की गयी सामग्री को प्रकाशित करने में नाकों चने चबाने पड़ गएएक पोस्ट के लिए निरंतर लगभग ३२ घंटे की सिटिंग देना भी मेरा निरर्थक हो जाता, यदि अनूप जी ने अंत में उसे अपने यत्न से हल कर के रात को अंततः प्रकाशित करने में सफलता पाई होतीजाने क्या तकनीकी समस्या गयी थी कि बार बार एरर और ब्लोगर की अक्षमता का संदेश रहा था तथा पब्लिश या सेव करने पर संदेश उड़ जाता थाअस्तुसंभवतः कोई अज्ञातशक्ति ऐन मौके पर लगन और प्रतिबद्धता की सच्चाई की परीक्षा ले रही होगी| २३ मार्च व्यतीत होने से कुछ पूर्व ही प्रविष्टि लग पाई

किंतु उस प्रविष्टि के जिस दूसरे भाग को कल सायं लगाने की दृष्टि से मैंने सँजो कर रख लिया था, वह चित्रावली थीअब इसे आगामी सोमवार तक टालने की अपेक्षा यहीं प्रस्तुत कर रही हूँआशा है, सभी इस ऐतिहासिक महत्व की सामग्री को उपयोगी पाएँगे










भगतसिंह का परिवार (बाएँ से) -
माता हुकमकौर (चाची), माता विद्यावती(माँ), माता जयकौर (दादी), माता हरनामकौर (चाची)








माता विद्यावती का युवकों को संदेश






























भगतसिंह को मृत्युदंड के आदेश
































भगतसिंह के trial के आधिकारिक दस्तावेज़

































भगतसिंह का पंजाबी(गुरुमुखी) में लिखा पत्र















भगतसिंह का उर्दू में लिखा पत्र ----------------------भगतसिंह का गुरुमुखी पंजाबी में लिखा पत्र


























क्रांतिकारी सुखदेव की माँ----------------- क्रांतिकारी राजगुरु की माँ




























वीरबलिदानी चंद्रशेखर आजाद -------------------------------- चन्द्रशेखर आजाद की माँ




























हिन्दी हस्तलेख में लिखा गत सिंह का पत्र------------ उर्दू हस्तलेख में गतसिंह की प्रिय पंक्तियाँ *

















*
उर्दू हस्तलेख में भगतसिंह की प्रिय पंक्तियों का देवनागरी पाठ


यह न थी हमारी किस्मत जो विसाले यार होता
अगर और जीते रहते यही इन्तेज़ार होता

तेरे वादे पर जिऐं हम तो यह जान छूट जाना
कि खुशी से मर न जाते अगर ऐतबार होता

तेरी नाज़ुकी से जाना कि बँधा था अहदे फ़र्दा
कभी तू न तोड़ सकता अगर इस्तेवार होता

यह कहाँ की दोस्ती है (कि) बने हैं दोस्त नासेह
कोई चारासाज़ होता कोई ग़म गुसार होता

कहूँ किससे मैं के क्या है शबे ग़म बुरी बला है
मुझे क्या बुरा था मरना, अगर एक बार होता
(ग़ालिब)

इशरते कत्ल गहे अहले तमन्ना मत पूछ
इदे-नज्जारा है शमशीर की उरियाँ होना

की तेरे क़त्ल के बाद उसने ज़फा होना
कि उस ज़ुद पशेमाँ का पशेमां होना

हैफ उस चारगिरह कपड़े की क़िस्मत ग़ालिब
जिस की किस्मत में लिखा हो आशिक़ का गरेबाँ होना
(ग़ालिब)

मैं शमाँ आखिर शब हूँ सुन सर गुज़श्त मेरी
फिर सुबह होने तक तो किस्सा ही मुख़्तसर है

अच्छा है दिल के साथ रहे पासबाने अक़्ल
लेकिन कभी – कभी इसे तन्हा भी छोड़ दे

न पूछ इक़बाल का ठिकाना अभी वही कैफ़ियत है उस की
कहीं सरेराह गुज़र बैठा सितमकशे इन्तेज़ार होगा

औरौं का पयाम और मेरा पयाम और है
इश्क के दर्दमन्दों का तरज़े कलाम और है
(इक़बाल)
अक्ल क्या चीज़ है एक वज़ा की पाबन्दी है
दिल को मुद्दत हुई इस कैद से आज़ाद किया

नशा पिला के गिराना तो सबको आता है
मज़ा तो जब है कि गिरतों को थाम ले साकी
(ग़ालिब)

भला निभेगी तेरी हमसे क्यों कर ऍ वायज़
कि हम तो रस्में मोहब्बत को आम करते हैं
मैं उनकी महफ़िल-ए-इशरत से काँप जाता हूँ
जो घर को फूँक के दुनिया में नाम करते हैं।

कोई दम का मेहमाँ हूँ ऐ अहले महफ़िल
चरागे सहर हूँ बुझा चाहता हूँ।

आबो हवा में रहेगी ख़्याल की बिजली
यह मुश्ते ख़ाक है फ़ानी रहे न रहे

खुदा के आशिक़ तो हैं हजारों बनों में फिरते हैं मारे-मारे
मै उसका बन्दा बनूँगा जिसको खुदा के बन्दों से प्यार होगा

मैं वो चिराग हूँ जिसको फरोगेहस्ती में
करीब सुबह रौशन किया, बुझा भी दिया

तुझे, शाख-ए-गुल से तोडें जहेनसीब तेरे
तड़पते रह गए गुलज़ार में रक़ीब तेरे।

दहर को देते हैं मुए दीद-ए-गिरियाँ हम
आखिरी बादल हैं एक गुजरे हुए तूफाँ के हम

मैं ज़ुल्मते शब में ले के निकलूँगा अपने दर मांदा कारवाँ को
शरर फशाँ होगी आह मेरी नफ़स मेरा शोला बार होगा

जो शाख-ए- नाज़ुक पे आशियाना बनेगा ना पाएदार होगा।


सौजन्य : प्रो.चमनलाल



14 comments:

  1. एक ऐसा तोहफा दिया आपने जो अनमोल है शहीद भगत सिंह के हस्त लिखित चिट्ठी धरोहर है देश के लिए

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  2. अद्भुत संकलन! शुक्रिया इसे यहां पेश करने के लिये।

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  3. आपका सत्प्रयास प्रणम्य है.

    शहीद-दिवस को राष्ट्रीय-पर्व के रूप में मनाना ज़रूरी है ,
    अन्यथा राजनीति के गर्द-गुबार में इतिहास के गम होने का खतरा है.
    इस सन्दर्भ में यह सामग्री सहेजकर आपने राष्ट्रीय सम्पदा के संरक्षण का कार्य किया है.

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  4. एक दुर्लभ संकलन के लिए धन्यवाद

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  5. प्रयास की जितनी भी प्रशंसा की जाए कम है।

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  6. अद्‌भुत है यह सब। आपको कोटिशः बधाई और धन्यवाद।

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  7. आपकी यह अथक मेहनत से एक ऐतिहासिक दस्तावेज़ भावी पीढी को तैयार मिलेगा। आपके इस परिश्र्म को नमन!!

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  8. ये तो बहुत ही नायाब और अमूल्य फोटो है ।
    आपने बहुत मेहनत की है इस पोस्ट पर ये दिख रहा है ।


    शुक्रिया ।

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  9. shandar.. iske alawa aur koi shabd nahi hai mere pas.. :)

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  10. बहुत खूब.. आपने बहुत मेहनत से इसे हम तक पहुंचाया.. आभार

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  11. ये पेज हमेशा बुकमार्क रहेगा मेरे पास कविता जी......आपने एक अमूल्य धरोहर दी है .

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  12. आपका बहुत बहुत आभार !!

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आपकी सार्थक प्रतिक्रिया मूल्यवान् है। ऐसी सार्थक प्रतिक्रियाएँ लक्ष्य की पूर्णता में तो सहभागी होंगी ही,लेखकों को बल भी प्रदान करेंगी।। आभार!

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