मणिपुरी कविता मेरी दृष्टि में - डॉ. देवराज (7)




मणिपुरी कविता मेरी दृष्टि में - डॉ. देवराज

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प्राचीन और मध्यकालीन मणिपुरी कविता : (७)

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मणिपुरी लोकगीतों के माध्यम से यह समझा जा सकता है कि यहां की सभ्यता और संस्कृति में वैदिक प्रभाव रहा है। इन लोकगीतों का अवलोकन करते हुए डॉ. देवराज बताते हैं :-


"तत्कालीन स्तोत्र साहित्य के अन्तर्गत प्र्कृति -पूजा सम्बन्धी रचनाएं मुख्य रूप से आती हैं\ये बहुत कुछ वैदिक स्तोत्र-साहित्य जैसी ही हैं। इनमें मानव-सभ्यता के विकास का प्रथम चरण विद्यमान है। ...उसी प्रक्रिया में संसार की अन्य भाषाओं की तरह मणिपुरी भाषा में भी स्तोत्र-रचना हुई। इनमें अग्नि, सूर्य, वर्षा आदि के साथ ही मृत्यु और सोरारेन [इन्द्र जैसा चरित्र] के सम्बन्ध में भी स्तोत्र प्राप्त हैं। मणिपुरी पौराणिक विश्वास के अनुसार पोइरैतोन नामक पात्र अग्नि लेकर आया था। यह अग्नि आज भी मणिपुर के ‘आन्द्रो’ नामक गांव के देवस्थान पर सुरक्षित है।स्तोत्र में कहा गया है:
पोइरैतोन खुन्थोक मै
पोइनाओताना खुल्लिङ मै
चकपा कागुप मै...

"प्राचीन मणिपुरी भाषा में सूर्य सम्बन्धी स्तोत्रों की विशेषता यह है कि उनमें सूर्य को देवताओं में प्रधान माना गया है। राजकुमार झलजीत सिंह ने अपने इतिहास-ग्रंथ में ऐसा एक स्थोत्र प्रस्तुत करते हुए इसका कारण यह बताया है कि उस काल में मणिपुर में भौगोलिक और जल्वायु सम्बन्धी कारणों से ठंड का प्रकोप थ, जिस कारण सूर्य की अधिक महत्ता थी। इसी प्रकार फ़सल के लिए वर्षा का महत्त्व स्वीकार करते हुए वर्षा के देवता के रूप में सोरारेन नामक देवता की कल्पना की गई है, जिसका चरित्र बहुत कुछ इन्द्र जैसा है। उसकी दया का आह्वान किया गया है:
हे कासा नोङ्थों सोरारेन
खाक्पा निङ्थौ पाङ्चम्बा
कासा पाओताक हैबा
अवाङ थाङ्वाइ योइरेनबा...
"सोरारेन की स्तुति के साथ साथ प्रचीन मणिपुरी भाषा में कुछ ऐसे गीत भी हैं, जिन्हें अनावृष्टि के समय गाया जाता था। वर्षा के आह्वान वाला एक गीत है-
नोङो चुथरो
लाङ्जिङ मतोन धम्हत्लो
पात्सोइ नुराबी ताओथरो
उनम पाकङ खुन्जरो
कौब्रु कौनु नोङ ओ
लोइजिङ लोइया नोङ ओ...
[बरसो वर्षा बरसो, लाङ्जिङ की चोटी तक डूब जाए, पात्सोइ की युवती बहे, उनम के युवा उठा लो, क्रौबु की पत्नी कौनु, पश्चिम के पर्वत से आनेवाली वर्षा, अचानक मूसलाधार बरसनेवाली गगन से धरा पर आओ...डॉ। आनन्दी देवी द्वारा किया गया भावानुवाद।]"



- क्रमश:

( प्रस्तुति : चंद्रमौलेश्वर प्रसाद )

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