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विश्वम्भरा'


`विश्वम्भरा' की
विशेष कविगोष्ठी व लोकार्पण






"मूल्य संक्रमण के वर्तमान दौर में पत्रकारिता के दायित्व को नए सिरे से पारिभाषित करने की आवश्यकता है। आज के समय में व्यवसायिकता और उपभोक्तावाद का इतना अधिक दबाव है कि समाज और संस्कृति की चिंता करने वाली मिशनरी पत्रकारिता दुर्लभ होती जा रही है। रंगीन विज्ञापनी पत्रिकाओं ने पाठक के मन-मस्तिष्क के ऊपर हमला बोल रखा है और मूल्यकेंद्रित पत्रकारिता हाशिये में चली गई है।" ये विचार यहाँ 'विश्वम्भरा' की विशेष गोष्टी में अध्यक्ष के रूप में बोलते हुए उच्च शिक्षा और शोध संस्थान के आचार्य डॉ. ऋषभ देव शर्मा ने प्रकट किए। वे देहरादून से प्रकाशित त्रैमासिक पत्रिका 'सरस्वती सुमन' के नववर्षांक का लोकार्पण करने के बाद कवियों और पत्रकारों को संबोधित कर रहे थे। डॉ. ऋषभ देव शर्मा ने आगे कहा कि आंदोलनकारी और समर्पित पत्रकारिता के अभाव के युग में 'सरस्वती सुमन' एक सामाजिक और सांस्कृतिक जागरण के लक्ष्य के साथ जुड़ी हुई ऐसी पत्रिका है जो स्थापित लेखकों के साथ-साथ नवोदित रचनाकारों को भी पूरे सम्मान और उत्साह के साथ प्रकाशित करती है।
इस अवसर पर 'सरस्वती सुमन' के सम्पादक डॊ आनंद सुमन मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। संस्था की और से उनका अभिनन्दन भी किया गया। डॉ. सुमन ने अपने सम्बोधन में बताया कि यह पत्रिका उनकी दिवंगत सहधर्मिणी श्रीमती सरस्वती सिंह की स्मृति में प्रारभ की गई है और इसका चरम उद्देश्य एक ओर तो भारतीय संस्कृति के मूल्यों की पुनः स्थापना करना है तथा दूसरी ओर यह नए रचनाकारों को एक मंच प्रदान करने का भी अभियान है।
आरंभ में 'विश्वम्भरा' की महासचिव डॉ. कविता वाचक्नवी ने संस्था और मुख्य अतिथि का परिचय दिया और कहा कि सोद्देश्य पत्रकारिता के क्षेत्र में 'सरस्वती सुमन' का विशिष्ट स्थान बन चुका है। कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में पधारे डॉ. किशोरीलाल व्यास, डॉ. रणजीत तथा डॉ. रामजी सिंह उदयन ने भी पत्रिका के सम्बन्ध में अपने उद्-गार प्रकट किए।
'सरस्वती सुमन' के नववर्षांक के लोकार्पण के अवसर पर आयोजित कवि-गोष्टी में सर्वश्री नरेन्द्र राय, बलबीर सिंह, भँवरलाल उपाध्याय, कन्हैया लाल अग्रवाल, गोविन्द मिश्र, बी।एल।अग्रवाल स्नेही, सविता सोनी, उमा सोनी, ज्योति नारायण, अंबादास, प्रकाश कुमार सोनी आदि ने विभिन्न विधाओं की सामाजिक यथार्थ से युक्त कविताओं का पाठ किया। चर्चा-परिचर्चा में सर्वश्री प्रो। टी। मोहन सिंह, डॉ. राजकुमारी सिंह,डॉ. अहिल्या मिश्रा, सम्पत मुरारका, अशोक जालान, नर सिंह, राजेश मुरारका,राजेश निर्मल, शंकर मुरारका, कृष्ण कुमार सोनी, शिवकुमार राजौरिया,आशा देवी सोमाणी, श्रीनिवास सोमाणी आदि ने भी सक्रिय भूमिका निभाई।
कार्यक्रम का संचालन 'विश्वंभरा' के संरक्षक युवा कवि द्वारकाप्रसाद मायछ ने किया। बी बालाजी के धन्यवाद प्रस्ताव के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

विश्वम्भरा' विश्वम्भरा' Reviewed by Kavita Vachaknavee on Monday, February 18, 2008 Rating: 5

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