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अब हिंदी माध्‍यम से (दूरस्थ शिक्षा के रूप में भी) कीजिए एमबीए, बीबीए की पढ़ाई : नए प्रवेश प्रारम्भ



अब हिंदी माध्‍यम से (दूरस्थ शिक्षा के रूप में भी) कीजिए एमबीए, बीबीए की पढ़ाई  नए प्रवेश प्रारम्भ 

                  देशभर में ढाई सौ अध्‍ययन केंद्रो के माध्यम से सैकड़ों विद्यार्थी कर रहे हैं प्रबंधन की पढ़ाई



हिंदी भाषा को ज्ञान-विज्ञान की भाषा के रूप में समृद्ध करने तथा रोज़गारोन्‍मुख बनाने के उद्देश्‍य से स्‍थापित महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय (केंद्रीय विश्‍वविद्यालय), वर्धा ने दूरस्‍थ शिक्षा (डिस्‍टेंस लर्निंग) के माध्‍यम से मैनेजमेंट के क्षेत्र में 'मास्‍टर ऑफ बिज़नेस एडमिनिस्ट्रेशन(एमबीए), बैचलर ऑफ बिज़नेस एडमिनिस्ट्रेशन (बीबीए), पोस्‍ट ग्रेजुएट डिप्‍लोमा इन मैनेजमेंट (पीजीडीएम), डिप्‍लोमा इन मैनेजमेंट (डीबीएम) के पाठ्यक्रम शुरू किया, देशभर में लगभग ढाई सौ अध्‍ययन केंद्रों के माध्यम से  सैकड़ों विद्यार्थी प्रबंधन के पाठ्यक्रमों में अध्‍ययन कर रहे हैं।


विश्‍वविद्यालय के कुलपति विभूति नारायण राय से एमबीए व बीबीए जैसे रोज़गारप‍रक पाठ्यक्रम को हिंदी माध्‍यम से चलाए जाने के संदर्भ में पूछने पर वे कहते हैं कि पहले हिंदी माध्‍यम से पढ़ाई करने पर उच्‍च वेतनमान पर नौकरी पाना बहुत आसान नहीं था, खासकर प्रबंधन व आईटी के क्षेत्रों में। गरीब विद्यार्थी अंग्रेज़ी माध्‍यम से शिक्षा न प्राप्‍त कर पाने के कारण बहुराष्‍ट्रीय कंपनियों में मोटी तनख्‍वाह पर रोज़गार पाने में असमर्थ हो जाते थे लेकिन अब वे हिंदी के बूते मैनेजमेंट के क्षेत्र में भी अपना लक्ष्‍य पूरा कर उच्‍च्‍ा वेतनमान पर नौकरी पा सकते हैं। विश्‍वविद्यालय ने पहली बार हिंदी माध्‍यम से एमबीए बीबीए की पढ़ाई शुरू की तो हिंदी भाषी लोगों में एक विशेष उत्‍साह दिखा, यही कारण है कि करीब हज़ार से भी अधिक विद्यार्थियों ने प्रबंधन पाठ्यक्रमों में प्रवेश लिया, केंद्र सरकार ने अब स्‍कूल ऑफ मैनेजमेंट खोलने की अनुमति दी है। उन्‍होंने कहा कि इससे पहले प्रबंधन जैसे व्‍यावसायिक पाठ्यक्रमों को हिंदी में चलाया जाना एक मिथक के रूप में लिया जाता था, लेकिन इस विश्‍वविद्यालय ने जोखिम उठाकर य‍ह प्रमाणित कर दिखाया कि प्रबंधन पाठ्यक्रम हिंदी माध्‍यम से भी चलाए जा सकते हैं। उन्‍होंने कहा कि हिंदी विश्‍व की प्रमुख भाषाओं में से एक है। अधिकांश बहुराष्‍ट्रीय कंपनियाँ हिंदी के माध्‍यम से उपभोक्‍ताओं तक पहुँचना चाहती हैं। हिंदी माध्‍यम से एमबीए करने पर तुरंत ही रोज़गार मिलेगा क्‍योंकि हिंदी अधिकांश उपभोक्‍ताओं की भाषा है। यहाँ से एमबीए करने वाले किसी भी कंपनी में बेहतर ढंग से काम कर सकेंगे। 



दूरस्‍थ शिक्षा केंद्र के निदेशक व प्रतिकुलपति प्रो.ए.अरविंदाक्षन का कहना है कि वस्तुतः यह संस्‍थान उन सभी व्‍यक्तियों के लिए रोज़गारपरक शिक्षा प्राप्ति का एक विशेष अवसर प्रदान कर सकेगा जो चाहत रखते हुए भी किसी कारण से प्रबंधन की पढ़ाई नहीं कर सकते हैं। प्रबंधन पाठ्यक्रमों के संयोजक डॉ.एम.एम. मंगोड़ी कहते हैं कि हिंदी माध्‍यम से और खासकर घर बैठे एमबीए की पढ़ाई कराने की मंशा को लोग खूब सराह रहे हैं, यही कारण है कि गत वर्ष गरीब और हाशिए के लोगों ने भी एमबीए की पढ़ाई करने के लिए दाखिला लिया | दरअसल यहाँ विद्यार्थियों को प्रबंधन के सिद्धांत के साथ-साथ व्‍यावहारिक ज्ञान से भी रू-ब-रू कराया जाता है ताकि प्रबंधन पाठ्यक्रमों में दक्षता एवं विश्‍वास एक साथ पैदा हो सके। विपणन प्रबंधन, मानव संसाधन प्रबंधन, वित्‍तीय प्रबंधन, उत्‍पादन एवं परिचालन प्रबंधन, व्‍यावसायिक वातावरण, व्‍यायसायिक नीतियाँ एवं रणनीतिक प्रबंधन, प्रबंधन सूचना प्रणाली एवं संगणक अनुप्रयोग, व्‍यावसायिक नियामक प्रारूप तथा वैकल्पिक के रूप में विपणन, मानव संसाधन प्रबंधन एवं बीमा, वित्‍तीय प्रबंधन आदि विषयों को एमबीए पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। छात्र मोहन आर्य स्‍वीकारते हैं कि घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने से नौकरी करनी पड़ी, कंपनी के मित्र कहते थे कि आपको एमबीए कर लेना चाहिए पर अंग्रेज़ी अच्‍छी न होने के कारण यह मेरे लिए एक सपना था जिसे हिंदी विश्‍वविद्यालय ने पूरा किया। निश्चित रूप से अब हम नौकरी करते हुए एमबीए की पढ़ाई पूरी कर सकते हैं। 


प्रवेश हेतु आवेदन कैसे प्राप्‍त करें : प्रवेश हेतु आवेदन पत्र विश्‍वविद्यालय की वेबसाइट www.hindivishwa.org से डाउनलोड करने पर या अध्‍ययन केंद्रों से लेने पर आवेदन पत्र के साथ किसी राष्‍ट्रीयकृत बैंक से रु. पाँच सौ (एमबीए व पीजीडीएम के लिए) तथा रु. तीन सौ (बीबीए व डीबीएम के लिए) का डीडी संलग्‍न कर निदेशक, दूरस्‍थ शिक्षा केंद्र, म.गा.अ.हि.वि.वि. के नाम से, जो वर्धा में देय हो, भेजना होगा। बैंक डिमांड ड्राफ्ट के पीछे नाम, पता व पाठ्यक्रम का नाम लिखकर निदेशक, दूरस्‍थ शिक्षा केंद्र, म‍हात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय, गांधी हिल, वर्धा (महाराष्‍ट्र) के पते पर भेजना होगा। आवेदन पत्र डाक से मंगाने पर क्रमश: रु.550 और रु.350 के डीडी भेजने होंगे। 


प्रवेश प्रक्रिया: एमबीए व पीजीडीबीएम में प्रवेश के लिए लिखित परीक्षा देनी होती है तथा अन्‍य पाठ्यक्रमों में सीधे प्रवेश दिया जाता है। 


विद्यार्थियों के लिए सुविधाएँ : दूरस्‍थ शिक्षा केंद्र के दिल्‍ली, इलाहाबाद कोलकाता सहित देशभर में लगभग 250 अध्‍ययन केंद्र हैं। अध्‍ययन केंद्र में विद्यार्थियों के लिए पढ़ाई के साथ-साथ इंटरनेट युक्‍त संगणक केंद्र आदि की सुविधाएँ प्रदान की जाती हैं। विद्यार्थियों को नामांकन के उपरांत अध्‍ययन सामग्री उनके घर पर भेजी जाएगी। परीक्षार्थी के निकटवर्ती अध्‍ययन केंद्र में परीक्षा ली जाती है। अनु.जाति एवं अनु.जनजाति के विद्यार्थियों के लिए उनके जनपद के समाज कल्‍याण अधिकारियों से छात्रवृत्ति प्राप्‍त करने का अवसर भी प्राप्‍त होता है। 


विश्‍वविद्यालय के दूरस्‍थ शिक्षा अंतर्गत एमबीए, बीबीए आदि पाठ्यक्रमों में प्रवेश हेतु नामांकन प्रक्रिया जारी है। अंतिम तिथि 31 अगस्‍त तथा विलम्‍ब शुल्‍क सहित 30 सितम्‍बर 2011 है। पाठ्यक्रमों की विस्‍तृत जानकारी हेतु विश्‍वविद्यालय की वेबसाइट www.hindivishwa.org पर लॉग-आन किया जा सकता है। साथ ही संयोजक, एमबीए व बीबीए पाठ्यक्रम, दूरस्‍थ शिक्षा केंद्र, म‍हात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय, गांधी हिल, वर्धा (महाराष्‍ट्र) व दूरभाष वर्धा 07152-232957, 251613, नई दिल्‍ली 011-41613875, इलाहाबाद 0532-2424442 पर संपर्क किया जा सकता है। 

अब हिंदी माध्‍यम से (दूरस्थ शिक्षा के रूप में भी) कीजिए एमबीए, बीबीए की पढ़ाई : नए प्रवेश प्रारम्भ अब हिंदी माध्‍यम से (दूरस्थ शिक्षा के रूप में भी) कीजिए एमबीए, बीबीए की पढ़ाई  : नए प्रवेश प्रारम्भ Reviewed by Kavita Vachaknavee on Friday, May 27, 2011 Rating: 5

1 comment:

  1. स्वागत.
    हिंदी और भारतीय भाषाओँ के माध्यम से तमाम तरह की उच्च व्यावसायिक शिक्षा उपलब्ध होनी ही चाहिए; और नौकरी भी.
    xxxxxxx
    वैसे वर्धा में दूरस्थ शिक्षा विभाग में ही हमारे एक पूर्व परिचित डॉ. मंगोड़ी भी कार्यरत हैं. अपने विभाग के प्रचार विषयक पोस्ट से उन्हें तो अतिरिक्त प्रसन्नता होनी चाहिए.
    हाँ, यहाँ हैदराबाद में भी कहीं वर्धा की इन परीक्षाओं की व्यवस्था है, सुना है.

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