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सम्पूर्ण व शुद्ध जन-गण-मन (अनुवाद व तीन लिपियों में) : कवीन्द्र रवीन्द्रनाथ ठाकुर के स्वर में




सम्पूर्ण जन-गण-मन ( अनुवाद व तीन लिपियों में) : कवीन्द्र रवीन्द्रनाथ ठाकुर के स्वर में

- (डॉ.) कविता वाचक्नवी 



अभी अभी भारत का स्वाधीनता दिवस भारतीयों ने मनाया है और प्रत्येक आयोजन में राष्ट्रगान अवश्य गाया गया होगा, आयोजनों के अतिरिक्त भी गाया जाता है, गाया गया होगा. भारत के राष्ट्रगान के व सम्मान्य  रवीन्द्रनाथ ठाकुर के उक्त समूचे गीत के देवनागरी पाठ के लिए पूरा हिन्दी का नेट खंगालने के उपरांत भी मुझे कहीं भी यह अपने समूचे, सही व शुद्ध रूप में नहीं मिला. हिन्दी विकीपीडिया पर यह अधूरा है व पदों का क्रम भी आगे पीछे है, अन्य भी कुछ लिंक यथासामर्थ्य देखे, तो पाठ में कई मुख्य त्रुटियाँ मिलीं. "मागे" को "माँगे" व "आशिष" को "आशीष" लिखने की त्रुटि तो इतनी सामान्य है कि यदि सुधारने की बात उठे तो लोग "माँगे" के ही पक्ष में तर्क देंगे. इन सारी व्यथाओं से ऊभ-चूभ होते हुए मैंने ठाना कि इसका विधिवत्  सम्पूर्ण पाठ व तद्संबंधी मुख्य सभी जानकारियाँ हिन्दी के पाठकों के लिए एक स्थल पर व समग्र रूप में सहेज कर रखीं   जानी चाहिए. इस भावना व  घंटों की खोजबीन का फल भी निकला, जिसे आप सभी देखें-पढ़ें व मित्रों के साथ अधिकाधिक बाँटें.


कुल तथ्य यह हैं कि ईस्वी सन १९१३ में साहित्य के नोबल सम्मान से सम्मानित कृति `गीतांजली' में संकलित गीत `जन-गण-मन' की रचना कवीन्द्र रवीन्द्र ने मूलतः बाँग्ला में १९१० के अविभाजित किन्तु परतंत्र  भारत में की थी.


मूलतः पाँच पदों वाले इस गीत का पहला पद भारत के राष्ट्रगान के रूप में समादृत व गाया जाता है.

Capt Ram Singh Thakur
राष्ट्रगान के रूप में समादृत गीत की धुन को रचा था कैप्टन रामसिंह ठाकुर जी ने.

भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस के २७ दिसंबर १९११ के कोलकाता अधिवेशन में सर्वप्रथम इसे विधिवत्  गाया गया था.



File:Ram Singh Thakur playing violin.jpg
महात्मा गाँधी के सान्निध्य में कप्तान रामसिंह ठाकुर वायलिन पर राष्ट्रगान की धुन बजा रहे हैं



कवीन्द्र रवीन्द्र के स्वर में इसका पाठ भी सुना जा सकता है, जिसे मैंने यहाँ अपलोड किया है  (क्लिक करें)    -







यह तो रही तथ्यों व स्वर तथा धुन की बात.
अब ज़रा इसका सही, सम्पूर्ण, शुद्ध व क्रमवार पाठ भी एक एक कर देखें -

मूल बाँग्ला में पाठ 

 জনগণমন-অধিনায়ক জয় হে


স্বদেশ --- রবীন্দ্রনাথ ঠাকুর


(1)
জনগণমন-অধিনায়ক জয় হে ভারতভাগ্যবিধাতা!
পঞ্জাব সিন্ধু গুজরাট মরাঠা দ্রাবিড় উত্‍‌কল বঙ্গ
বিন্ধ্য হিমাচল যমুনা গঙ্গা উচ্ছলজলধিতরঙ্গ
    তব শুভ নামে জাগে, তব শুভ আশিস মাগে,
        গাহে তব জয়গাথা।
জনগণমঙ্গলদায়ক জয় হে ভারতভাগ্যবিধাতা!
    জয় হে, জয় হে, জয় হে, জয় জয় জয়, জয় হে॥
(2)
অহরহ তব আহ্বান প্রচারিত, শুনি তব উদার বাণী
হিন্দু বৌদ্ধ শিখ জৈন পারসিক মুসলমান খৃস্টানী
    পূরপ পশ্চিম আসে তব সিঃহাসন-পাশে
        প্রেমহার হয় গাঁথা।
জনগণ-ঐক্য-বিধায়ক জয় হে ভারতভাগ্যবিধাতা!
    জয় হে, জয় হে, জয় হে, জয় জয় জয়, জয় হে॥
(3)
পতন-অভ্যুদয-বন্ধুর পন্থা, যুগ-যুগ ধাবিত যাত্রী।
হে চিরসারথি, তব রথচক্রে মুখরিত পথ দিনরাত্রি।
    দারুণ বিপ্লব-মাঝে তব শঙ্খধ্বনি বাজে
        সণ্কটদুঃখত্রাতা।
জনগণপথপরিচায়ক জয় হে ভারতভাগ্যবিধাতা!
    জয় হে, জয় হে, জয় হে, জয় জয় জয়, জয় হে॥
(4)
ঘোরতিমিরঘন নিবিড় নিশীথে পীড়িত মুর্ছিত দেশে
জাগ্রত ছিল তব অবিচল মঙ্গল নতনয়নে অনিমেষে।
    দুঃস্বপ্নে আতন্কে রক্ষা করিলে অন্কে
        স্নেহময়ী তুমি মাতা।
জনগণদুঃখত্রাযক জয় হে ভারতভাগ্যবিধাতা!
    জয় হে, জয় হে, জয় হে, জয় জয় জয়, জয় হে॥
(5)
রাত্রি প্রভাতিল, উদিল রবিচ্ছবি পূর্ব-উদয়গিরিভালে--
গাহে বিহঙ্গম, পূণ্য সমীরণ নবজীবনরস ঢালে
    তব করুণারুণরাগে নিদ্রিত ভারত জাগে
        তব চরণে নত মাথা
জয় জয় জয় হে, জয়রাজেশ্বর ভারতভাগ্যবিধাতা
    জয় হে, জয় হে, জয় হে, জয় জয় জয়, জয় হে॥






बाँग्ला के पाठ का रोमन लिप्यन्तरण  व अंग्रेजी रूपांतर 
अंग्रेजी अनुवाद : श्री सितांशु शेखर मित्र (साभार)



Jano Gano Mano Adhinaayako Jayo Hey
Bhaarato Bhaagyo Bidhaataa
Oh! the ruler of the mind of the people,
Victory be to You, dispenser of the destiny of India!
Panjaabo Sindhu Gujaraato Maraathaa
Draabirho Utkalo Bango
Bindhyo Himaachalo Jamunaa Gangaa
Uchchhalo Jalodhi Tarango
Punjab, Sind, Gujrat, Maharastra,
Drabir (South India), Orissa, and Bengal,
the Bindhya, the Himalayas, the Jamuna, the Ganges,
and the oceans with foaming waves all around
Tabo Shubho Naamey Jaagey
Tabo Shubho Aashisho Maagey
Gaahey Tabo Jayogaathaa
Wake up listening to Your auspicious name,
ask for Your auspicious blessings,
And sing to Your glorious victory.
Jano Gano Mangalo Daayako
Jayo Hey Bhaarato Bhaagyo Bidhaataa
Oh! You who impart well being to the people!
Victory be to You, dispenser of the destiny of India!
Jayo Hey, Jayo Hey, Jayo Hey,
Jayo Jayo Jayo Jayo Hey
Victory, victory, victory to Thee!
(refrain repeated five times)
(2)
Aharaho Tabo Awhbaano Prachaarito
Shuni Tabo Udaaro Baani
Hindu Bauddho Shikho Jaino
Parashiko Musholmaano Christaani
Your call is announced continuously,
we heed Your gracious call.
The Hindus, Buddhists, Sikhs, Jains,
Muslims, and Christians,





Purabo Pashchimo Aashey
Tabo Singhaasano Paashey
Premohaaro Hawye Gaanthaa
The East and the West come
to the side of Your throne
And weave the garland of love.
Jano Gano Oikyo Bidhaayako Jayo Hey
Bhaarato Bhaagyo Bidhaataa
Jayo Hey, Jayo Hey, Jayo Hey,
Jayo Jayo Jayo, Jayo Hey
Oh! You who bring in the unity of the people!
Victory be to You, dispenser of the destiny of India!
(3)
Patano Abhyudayo Bandhuro Panthaa
Jugo Jugo Dhaabito Jaatri
Hey Chiro Saarothi, Tabo Ratha Chakrey
Mukharito Patho Dino Raatri
The way of life is somber as it moves through ups and downs.
But we, the pilgrims, have followed through ages.
Oh! Eternal Charioteer, the wheels of your chariot
echo day and night in the path
Daaruno Biplabo Maajhey
Tabo Shankhodhwoni Bajey
Sankato Duhkho Traataa
In the midst of fierce revolution
your conch shell sounds.
You save us from fear and misery.
Jano Gano Patho Parichaayako
Jayo Hey Bhaarato Bhaagyo Bidhaataa
Jayo Hey, Jayo Hey, Jayo Hey,
Jayo Jayo Jayo, Jayo Hey
Oh! You who guide the people through tortuous path!
Victory be to You, dispenser of the destiny of India!
(4)
Ghoro Timiro Ghono Nibiro
Nishithey Pirhito Murchhito Deshey
Jagrato Chhilo Tabo Abichalo Mangalo
Nato Nayoney Animeshey
During the bleakest of nights,
when the whole country was sick and in swoon
Wakeful remained Your incessant blessings
through Your lowered but winkless eyes.
Duhswapney Aatankey
Rakkhaa Koriley Ankey
Snehamoyi Tumi Maataa
Through nightmares and fears
You protected us on Your lap
Oh Loving Mother.
Jano Gano Duhkho Trayako
Jayo Hey Bhaarato Bhaagyo Bidhaataa
Jayo Hey, Jayo Hey, Jayo Hey,
Jayo Jayo Jayo, Jayo Hey
Oh! You who have removed the misery of the people!
Victory be to You, dispenser of the destiny of India!
(5)
Raatri Prabhatilo Udilo Rabichhabi
Purbo Udayo Giri Bhaaley
Gaahey Bihangamo Punyo Samirano
Nabo Jibano Rasho Dhaley
The night is over, and the Sun has risen
over the eastern horizon.
The birds are singing, and a gentle auspicious breeze
is pouring the elixir of new life.
Tabo Karunaaruno Ragey
Nidrito Bhaarato Jagey
By the halo of Your compassion
India that was asleep is now waking
Jayo Jayo Jayo Hey, Jayo Rajeshwaro
Bhaarato Bhaagyo Bidhaataa
Jayo Hey, Jayo Hey, Jayo Hey,
Jayo Jayo Jayo, Jayo Hey
Victory be to You, the Supreme King!
dispenser of the destiny of India!


 देवनागरी पाठ 

(१)


जन-गण-मन-अधिनायक जय हे भारतभाग्यविधाता!
पंजाब सिन्धु गुजरात मराठा द्राविड़ उत्कल बंग
विंध्य हिमाचल जमुना गंगा उच्छलजलधितरंग
तव शुभ नामे जागे, तव शुभ आशिष मागे
        गाहे तव जयगाथा
जन-गण-मंगलदायक जय हे भारतभाग्यविधाता!
जय हे,जय हेजय हेजय जय जय हे

()

अहरह तव आह्वान प्रचारित सुनि तव उदार वाणी
हिंदु बौद्ध सिख जैन पारसिक मुसलमान खृस्तानी
पूरब पश्चिम आसे, तव सिंहासन पासे
प्रेमहार होय गाँथा
जन-गण-ऐक्य-विधायक जय हे भारतभाग्यविधाता!
जय हे,जय हे,जय हे,जय जय जय हे

(३)


पतन-अभ्युदय-बंधुर पन्था,युग युग धावित यात्री
हे चिरसारथि,तव रथचक्रे मुखरित पथ दिनरात्रि
दारुण विप्लव माँझे तव शंखध्वनि बाजे
      संकट-दुःखत्राता
जन-गण-पथ-परिचायक जय हे भारतभाग्यविधाता!
जय हे,जय हे जय हे,जय जय जय हे॥

(४)

घोरतिमिरघन निबिड़ निशीथे पीड़ित मूर्छित देशे
जाग्रत छिल तव अविचल मंगल नतनयने अनिमेषे
दुःस्वप्ने आतंके, रक्षा करिले अंके
   स्नेहमयी तुमि माता
जन-गण-दुःखत्रायक जय हे भारतभाग्यविधाता!
जय हे,जय हे,जय हे,जय जय जय हे

(५)

रात्रि प्रभातिल उदिलो रविच्छवि पूर्व-उदयगिरिभाले
गाहे विहंगम पुण्य समीरण नव जीवन रस ढाले
तव करुणामय रागे, निद्रित भारत जागे
    तव चरणे नत माथा
जय जय जय हे जयराजेश्वर भारतभाग्यविधाता!
जय हे, जय हे,जय हे, जय जय जय हे


आशा है, इस सँजो कर रखी जाने वाली सामग्री का सदुपयोग आप राष्ट्रगान के प्रति बरती जानेवाली अतिरिक्त सतर्कता के साथ (व रचनाकार तथा राष्ट्र के प्रति ) ससम्मान करेंगे एवं भविष्य में इसके पाठ व उच्चारण संबंधी त्रुटियों के विरोध में सर्वदा  सतर्क रहेंगे.

जय भारत

***


अपडेट / 27 जनवरी 2012 
गीतकार बुद्धिनाथ मिश्र ने इस लेख पर एक टिप्पणी लिख भेजी हैं व इसे मेरे मूल लेख के साथ देने का आग्रह किया है ताकि गीत के पाठ के समय लोग इन बिंदुओं का ध्यान भी रख सकें -

‘जन-गण-मन’ की रचना बंगला भाषा में हुई, जिसका उच्चारण,शब्दार्थ आदि संस्कृत/हिन्दी से कहीं-कहीं बिलकुल भिन्न है। देवनागरी में उसे उतारते समय हिन्दी की प्रकृति को यथासम्भव ध्यान में रखा गया है।
१.उदाहरण के लिए ‘अधिनायक’ का अर्थ बंगला में ‘कप्तान’ होता है,जबकि हिन्दी में ‘तानाशाह’।
२.संस्कृत की पारम्परिक उच्चारण –व्यवस्था (शब्दानुशासन) के अनुसार बंगला में भी शब्द के प्रारम्भ में आनेवाले ‘य’ का उच्चारण ‘ज’ होता है। इसी प्रकार, ‘दुःखत्राता’ का उच्चारण ‘दुःखत्त्राता’ के रूप में और ‘शंखध्वनि’ का ‘शंखद्ध्वनि’ के रूप में होगा। जो हिन्दी के अध्यापक इस संस्कृत शब्दानुशासन को नहीं जानते हैं,वे प्रसाद जी के प्रयाण-गीत ‘बढे चलो’ में ‘दृढप्रतिज्ञ’ का सही उच्चारण ‘दृढप्प्रतिज्ञ’ नहीं कर पाते हैं,जिससे उनके काव्यपाठ का प्रवाह बाधित होता है।
३.बंगला में ‘स’ ध्वनि का उच्चारण ‘श’ के रूप में होता है: आसे>आशे,सुनि>शुनि,सिन्धु>शिन्धु, स्वप्न>श्वप्नो आदि।
४.बंगला में सामान्यतः ‘अ’ का उच्चारण ‘ओ’ होता है,जबकि लिखा ‘अ’ ही जाता है,जैसे छिल>छिलो,बंधु>बोंधु, मंगल>मोंगोलो,बंग>बोंगो, तरंग>तरोंगो आदि।
५. मूल पाठ में बंगला की उच्चारण – व्यवस्था के अनुसार ‘गुजराट’ और ‘खृष्टानी’ शब्द हैं।
६.अन्य लोकभाषाओं की तरह बंगला में भी ह्रस्व-दीर्घ के उच्चारण में काफ़ी उदारता बरती जाती है। इस प्रकार ‘रात्रि’ में ‘त्रि’ को दीर्घ और ‘गाहे’ में ‘हे’ को ह्रस्व पढा जायेगा।


सम्पूर्ण व शुद्ध जन-गण-मन (अनुवाद व तीन लिपियों में) : कवीन्द्र रवीन्द्रनाथ ठाकुर के स्वर में सम्पूर्ण व शुद्ध जन-गण-मन (अनुवाद व तीन लिपियों में) : कवीन्द्र रवीन्द्रनाथ ठाकुर के स्वर में Reviewed by Kavita Vachaknavee on Wednesday, August 18, 2010 Rating: 5

70 comments:

  1. सम्पूर्ण रचना प्रस्तुत करने के लिये हार्दिक धन्यवाद.

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    Replies
    1. MAI MANTA HOON KI RASHTRA GAAN MEIN KUCH SANSHODHAN HONA AVASHAYAK HAI.....
      AUR ISKA HINDI ANUWAAD BANCHO KO PADHANA SCHOLL MEIN HAR CLAAS MEIN BHI ZAROORI HAI....

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    2. vendey matram rashtriya gaan hona chie

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  2. rashtragaan ke baare mey itani sundar jankari de kar aapne bhalaa kaam kiya. abhibhoot hoo mai. mazaa aa gaya. poora geet dekh bhi khushi hui.

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  3. पर यह भाग्य विधाता कौन है? वही जार्ज पंचम.....
    और आज भी हम उसकी स्तुति कर रहे हैं!!!!!!

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    Replies
    1. Aap bilkul theek keh rahe hain ham aaj bhi george ki satuti kar rahe hain

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    2. Why we don't declare to vande mataram as a national anthem of Hindustan?

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  4. @चन्द्रमौलेश्वर जी,
    भारत भाग्य विधाता वाले विषय पर इतनी चर्चाएँ, बहसें, विमर्श और स्वयं कवीन्द्र रवीन्द्र तक लिख चुके हैं. उसके बाद भी यदि आपकी यही धारणा है तो कोई कहे.

    मुझे तो इस गीत व इसकी धुन में से कुछ भी कभी भी सुनाई पड़ जाए तो सारे विचारशून्य हो जाते हैं, रोंगटे खड़े हो जाते हैं व रोमांच से आँसू आ जाते हैं.

    मैं तो इस सम्बन्ध में किसी तर्क के योग्य नहीं रहती.

    तर्क वाले तर्क करें, मखौल उड़ाने वाले मखौल उड़ाएँ. परन्तु कुछ चीजें कई बार तर्क से परे होती हैं.

    राष्ट्रगान में इन या उन शब्दों की अपेक्षा यदि कोई न समझ आने वाले ध्वनि-चिह्न भी होते तो वे मेरे लिए तो प्रणम्य ही होते.

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    Replies
    1. muhe chama karen agar maine kuch galat bola ho to......
      "Bharat Bhagya vidhata" ki jagah "bharat bhoomi meri mata"
      yaa issi se milta julta sanskrit shabd se sanshodhan hona chahiye....

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    2. ma'am if you read it you will feel its written for THE administrator THE king THE dispenser.....
      the same tune the same words can be used to make OUR national Anthem to dedicate to our "bharat maa"...."mother land"....."the all mighty BHarat Mata" there are thousands of sanskrit experts which will help us to modified it .....

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    3. mujhe itna gyaan nahi jitna Lalit ji ne aapko bata ya par.....
      mera ye manana hai ki desh bhakti ka bhajan hota hai national anthem isko aise likhe jise padhne mein garv ho.... gane mein garv ho ....aur meaning samajh mein aane mein desh ke prati jaan dene ki bhawna utpaan ho..... mai yeh isi liye keh raha hoon kyun choti si ji bhi bada difference la sakti hai.....

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    4. haan angreji lipi ka upayog karne ke liye chaamma mangata hoon ...
      kyun ki main bhi apne bharat ka Indian nagrik hoon....is vivdhata se main apane aap ko bacha nahi saka.....

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  5. From: Lalit Walia (lkahluwalia@yahoo.com)
    To: Me (Kavita Vachaknavee)
    Sent: Wed, 18 August, 2010 18:04:53
    Subject: सम्पूर्ण



    कविता जी..,
    राष्ट्र-गान के सन्दर्भ में आपका शोध सराहनीय है; बधाई स्वीकार करें! किन्तु स-आदर एक बात की पुष्टि आवश्य करना चाहूंगा! राष्ट्र-गान में 'मागे' के स्थान पर 'माँगे' गाये जाने पर त्रुटिपूर्ण स्थिति नही बनती; क्योंकि 'मागे' केवल बंगाली उच्चारण है जिसका तात्पर्य 'माँगे', अर्थात 'चाहे' (दुआ करे) से ही है! हालांकि आम बात-चीत की बँगला-भाषा में 'चाहना' के लिए 'मागे' नही बल्कि 'दोरकार' (उर्दू शब्द 'दरकार' का बंगाली उच्चारण) प्रयोग होता है, किन्तु काव्यात्मक प्रक्रिया के अंतर्गत 'मागे' (चाहे) प्रयोग कर लिया गया है! इस दृष्टिकोण से हिंदी में गाये जाने पर 'माँगे' उच्चारण आपत्तिजनक नही मना जा सकता! राष्ट्र-गान का ये सम्पूर्ण रूप मुझे लगभग तीन वर्ष पूर्व एक बंगाली पत्रकार-मित्र द्वारा, कविराज 'र'वीन्द्रनाथ ठाकुर' जी के सम्मानित गीत-संकलन 'गीतांजली' के साथ उपहार स्वरुप प्राप्त हुआ था! अ'स्वभाविकता-युक्त इसी शब्द को ले कर चर्चा भी हुई थी! निष्कर्ष यही था जो टिप्पणी के उपरोक्त भाग में कहा है! आपकी बात सत्य है; 'माँगे' शब्द के तो पक्ष में ही तर्क होगा, क्योंकि ये स्वाभाविक भी तो है! यदि 'मागे' शब्द का कोई दूसरा हिंदी-अर्थ जो राष्ट्र-गान की उक्त पंक्ती के भावार्थ पर भी पूर्ण उतरता हो तो अवश्य बताएं! सीखना तो इति-रहित है, सो, स्वागत है! हाँ... 'आशिष' को 'आशीष' लिखना निःसंदेह ग़लत है!
    राष्ट्र-गान के तथ्यों का खुलासा कर जो जानकारी आपने पाठकों व मित्रों को उपलब्ध करवाई है वो अति-प्रशंसनीय है!
    (ये टिप्पणी एक बंगाली पत्रकार के साथ इसी विषय पर हुई चर्चा के आधार पर है)

    Lalit Ahluwalia 'Aatish'

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  6. आतिश जी के लिए कल मैंने सन्देश भेजा -

    From: Dr.Kavita Vachaknavee
    To: Lalit Walia (lkahluwalia@yahoo.com)
    Sent: Wed, August 18, 2010 2:02:50 PM
    Subject: Re: सम्पूर्ण




    आतिश जी, आप कैसे कवि हैं, कि आपको किसी कवि की मूल रचना में छेड़ छाड़ में कोई दोष दिखाई नहीं दे रहा और आप अर्थ साम्यता के आधार पर तर्क दे रहे हैं. नोबेल विजेता कवि की राष्ट्रगान के रूप में स्थापित इतने महत्व की कविता को यदि देश वाले दोषों व संक्रमण से नहीं बचा पाते, व न बचाने के लिए तर्क वितर्क करते हैं तो मामला डूब मरने का है हमारे लिए. कल को कोई भविष्य का व्यक्ति यह तर्क दे कि रवीन्द्र ने बाँग्ला कविता में हिन्दी के शब्द कैसे घुसेड़े तो आने वाली पीढ़ियों में किस किस को क्या क्या व कौन कौन तर्क देगा?

    ये सब रहने भी दें. तो क्या किसी भी रचनाकार की रचना में रत्ती भर भी परिवर्तन करने का अधिकार किसी ऐरे गैरे का बनता है? आप से `मागे' याद नहीं रखा जाता या उच्चरित नहीं होता तो हिन्दी में बदल देंगे उसे? कभी सोचा है, कि बाँग्ला वालों को (बांगला वाले का अर्थ आपका केवल एक या डॉ परिचित नहीं होता) कैसा लगता होगा?
    ऐसी तथ्यात्मक गलतियों का अधिकार किसने दिया?


    - (डॉ.) कविता वाचक्नवी
    http://www.google.com/profiles/kavita.vachaknavee

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  7. फिर भी दुराग्रह

    From: Lalit Walia
    To: Dr.Kavita Vachaknavee

    Sent: Thu, 19 August, 2010 3:43:18
    Subject: Re: सम्पूर्ण

    कविता जी...,
    'मागे' (बिना बिंदू के) बंगाली शब्द ही है जिसे बंगला लोग अपनी भाषा-व्यवस्था अनुसार ही उच्चारण करते हैं, तदानुसार राष्ट्र-गान भी पढ़ते व गाते हैं! किन्तु हिंदी लिपि में राष्ट्र-गान के लिखने अथवा गाने पर 'माँगे' में कोई दोष नही दीखता है!
    क्यों कि (जैसे पहले बता चुका हूँ) दोनों का तात्पर्य 'चाहने' से ही है! अन्यथा 'मागे' का कोई और अर्थ (बंगाली या हिंदी में) नही होता! कवी की रचना बँगला में है इसलिये 'मागे' ही सही मना जाता है! मूल रचना में छेड़-छाड़ जो भी करता है ये उसका निजी बुद्धी-स्तर का मामला है! ऐसे में केवल उसे बोध ही करवाया जा सकता है, समझना या ना समझना उसका मानविक अधिकार है!
    किन्तु 'मागे' अथवा 'माँगे' का विषय लंबा खींचने योग्य ठोस नही है! क्योंकि शिक्षा-स्तर एवं उच्चारण योग्यता-अ-योग्यता भी इस तर्क की अड़चनें हैं! खेद तो बहुत है, किन्तु यहाँ अपना मत बदलना कठिन लग रहा है!
    क्षमा याचना सहित...
    ललित अहलूवालिया 'आतिश

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  8. यह सत्य है कि जन गण मन आज राष्ट्रगीत है, अतः इसका सम्मान करना चाहिए. पूरे गीत के लिए आभार.

    ReplyDelete
  9. आपकी मेहनत प्रशंसनीय है। कुछ ऐसी ही मेहनत मुझे अपने स्कूल में सम्पूर्ण राष्ट्रगीत लिखवाने के समय करनी पड़ी थी।

    मागे की तरह बिना बिन्दी वाले और भी कई शब्द हैं बांग्ला में जैसे "मा"।

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  10. कविताजी .. लिंक नहीं खुल रहा है !!

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  11. इस आलेख ने सम्पूर्णतः प्रस्तुत किया है राष्ट्रगान को ! कवीन्द्र रवीन्द्र के स्वर में इसे सुनना उपलब्धि रही ! आभार ।

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  12. बहुत उम्दा, निरंतर पठनीय, स्मरणीय और संग्रहणीय भी......

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  13. जी , सुन्दर और पठनीय ......
    धन्यवाद ||

    ReplyDelete
  14. mai aatish ji ki baat se sahmat hoon ...anuvad agar kisi bhasha vishesh me kiya jata hai to us bhasha ki sanskrati ka bhi dhyan rakhna hota hai ...agar do bhashaoo ke shabd smaan hai parantu unme uchcharan bhet bhi hai to grahya hai ...agar itni hi shuchita rakhani hai to rashtra-gaan ko bangla-bhasha me hi kyo n gaya jaye jisase bangali log or bhi jyada khush honge...kavita ji itna duragrah theek nhi ....itani achchhi jankari ke liye dhanyawad..

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  15. आभार इस महत्वपूर्ण जानकारी के लिए

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  16. ज्ञानवर्धक जानकारी आभार !

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  17. मैडम जी इस प्रसंग पर मै आपसे इतिफ़ाक नही रखता कतिपय आप भी कांग्रेशियो की जुबान मे जबर्दस्ती वाली बात समेट रही है १९१० और १९१३ मे भारत के जन गण और मन का अधिनायक कौन था ? अधिनायक शब्द का अर्थ क्या होता है ? और भारत का भाग्य विधाता कौन था ? पंजाब सिंध गुजरात महाराष्ट्र तमिल उडीसा बंगाल के बाद के राज्यो का नाम कविन्द्र ने गीत मे क्यो नही लिया ? टाईगोर का टाइ टिल किसने दिया ? एक जमीन्दार का बेटा कभी भी देश की आजादी की लडाई मे एक सेनानी की तरह क्यो नही लडा ? महज हजारो गीत और स्कूल से कोइ बडा नही होता । पाश भगत सिन्घ बिस्मिल भी क्या गीतकार नही थे ? क्यो नही उन गीतो को राष्ट्रगान बनाया गया ? मै कविन्द्र को इनसे बहुत कमतर समझता हूं और इस गीत को काट छाट कर कांग्रेशियो ने दलाली मे राष्ट्र्गान बना लिया और वही काम आप भी करके हमे ज्ञान दे रही है । जय शंकर प्रसाद और इकबाल को क्यो नही नोबेल मिला ? कोई जबाब है आपके पास ? जवाब जानने के लिये सच के साथ खडा होना पडेगा हिम्मत चाहिये सच बोलने के लिये ? यह अलग बात है कि हम सम्मान वश कुछ नही बोलते इसका मतलब यह कतई नही कि हम कुछ नही जानते

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    1. 80 percent logo ko is sachai ke bare main nahi pta k ye geet Rabinder ji ne George fifth ki parshansa main likha tha.ab sabi log iski translation kar lain

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    2. ye geet tagore ji ne britishers ke liye gaiya hai,jaise ki aap sab log jante hai ki raja jo hota hai vo apne kavi se apni tariif geet ke roop mai karwata hai,vaise hi britishers ne ye geet apni victory ke liye gawaiya gaiya hai,{1st line mai hi likha hai he vidhatao aap ki jai ho,aur ye nadhi ye pahar aap ke charo aur khare hai,fir last line mai hai he britishers utho aur apni jeet ko suno,aur jeet aap ko hi aai}us waqt bharat ke vidhata britishers thai,to sab bhartiyo se neeveden hai ki jitna ho sake aap is geet ke baare mai sab ko batai,bharat ki jai ho,jai hindu

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    3. Shiv Sambho ji, aap sahi kah rahe hai, fir bhee kisi bhee itihas ki pustak me mujhe iska praman nahi mila ki ye jarj ke liye hai..sab yahee kah rahe hai bharat desh kee janta ke liye hai..shayad ye rajniti ke karan ho

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  18. इतने अन्तराल के बाद इस विषय में कुछ लिखना उचित नहीं है ।फिर भी आप ने इस विषय
    में जो परिश्रम किया ओर सही बात सामने रखी ,इस के लिंए आप को धन्यवाद देता हूँ ।

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  19. प्रभावशाली ,
    जारी रहें।

    शुभकामना !!!

    आर्यावर्त
    आर्यावर्त में समाचार और आलेख प्रकाशन के लिए सीधे संपादक को editor.aaryaavart@gmail.com पर मेल करें।

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  20. कविता जी आपका शोध सराहनीय है परन्तु यह सत्य की यह गीत जोर्ज पंचम के स्वागत में गया गया था इसे कोई जुथाला नही सकता, यह गैर बात है की हम हजारों वर्षो की गुलामी के तहत इतना दब चुके हैं की अपने स्वाभिमान को मुखर नही कर सकते , क्यूँ नही वन्दे मातरम को राष्ट्रिय गीत बनाया गया क्या कमी थी सिर्फ एक वर्ग को खुश करने के लिए? जरा ऊपर उठ कर सोचिये विचारों को संस्कार की धरोहर में झाँक कर देखिये आपको अपना दर्पण दिखेगा|

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    1. chaudhary saab aapka aitraj jayaj hai.lekin jahan tak rastriya geet ki baat hai wo bande matram hi hai , jan gan ... rashtra gan hai. haan ye baat alag hai ki rashtra geet aur rashtra gaan dono BANDE MATRAM hota to kitna accha hota.Aaj to BANDE MATRAM jo gate hain unhe sampradayik samjha jata hai

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    2. Baat yeh nahi ki yeh geet hai ya gaan. Baat hamare andhere mein rehne ki hai bhai sahab

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  21. jo hmare national anthem ke bhi ijat nhi karte un ko saram aani chahiye.... or pakistan chle jana chahiye

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  22. jo hmare national anthem ke bhi ijat nhi karte un ko saram aani chahiye.... or pakistan chle jana chahiye

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  23. Bhai karan kapoor tera kasoor nhi hai ghulami hamare khoon me bas chuki hai .
    Waise to hamari rashtriya bhasha hindi hai fir bhi courts me urdu aur english ka hi use hota hai

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  24. This comment has been removed by the author.

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  25. mera sabhi se anurodh hai ek bar niche diye gaye link par jaakar bhai rajeev dikshit dwara diye gaye
    vyakhyan ko jarror sune, taki aap log jaan sake yeh kab or kyun likha gaya tha...

    Jana Gana Mana Vs Vandematram:

    http://rajivdixitmp3.com/?p=105

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  26. सन 1911 तक भारत की राजधानी बंगाल हुआ करता था।
    सन 1905 में जब बंगाल विभाजन को लेकर अंग्रेजो के खिलाफ बंग-भंग आन्दोलन के विरोध में बंगाल
    के लोग उठ खड़े हुए तो अंग्रेजो ने अपने आपको बचाने के लिए के कलकत्ता से हटाकर
    राजधानी को दिल्ली ले गए और 1911 में दिल्ली को राजधानी घोषित कर दिया।
    पूरे भारत में उस समय लोग विद्रोह से भरे हुए थे तो
    ***अंग्रेजो ने अपने इंग्लॅण्ड के राजा को भारत
    आमंत्रित किया ताकि लोग शांत हो जाये।
    इंग्लैंड का राजा जोर्ज पंचम 1911 में भारत में आया।
    रविंद्रनाथ टैगोर पर दबाव बनाया गया कि तुम्हे एक गीत जोर्ज पंचम के स्वागत में
    लिखना ही होगा।
    उस समय टैगोर का परिवार अंग्रेजों के काफी नजदीक हुआ करता था,
    उनके परिवार के बहुत से लोग ईस्ट इंडिया कंपनी के लिए काम किया करते थे,
    उनके बड़े भाई अवनींद्र नाथ टैगोर बहुत दिनों तक ईस्ट इंडिया कंपनी के कलकत्ता डिविजन के
    निदेशक (Director) रहे।
    रविंद्रनाथ टैगोर ने मन से या बेमन से जो गीत लिखा
    उसके बोल है “जन गण मन अधिनायक
    जय हे भारत भाग्य विधाता”। इस
    गीत के सारे के सारे शब्दों में अंग्रेजी राजा जोर्ज पंचम का गुणगान है,
    जिसका अर्थ समझने पर पता लगेगा कि ये तो हकीक़त में ही अंग्रेजो
    की खुशामद में लिखा गया था।
    इस राष्ट्रगान का अर्थ - “भारत के नागरिक, भारत की जनता अपने मन
    से आपको भारत का भाग्य विधाता समझती है और मानती है।
    हे अधिनायक (Superhero) तुम्ही भारत के भाग्य विधाता हो।
    तुम्हारी जय हो ! जय हो ! जय हो ! ....... ( शेष दूसरे भाग में )

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  27. दूसरा भाग -
    भारत आने से सभी प्रान्त पंजाब, सिंध, गुजरात, मराठा
    मतलब महारास्त्र, द्रविड़ मतलब दक्षिण भारत, उत्कल मतलब उड़ीसा,
    बंगाल आदि और जितनी भी नदिया जैसे यमुना और गंगा
    ये सभी हर्षित है, खुश है,
    प्रसन्न है , तुम्हारा नाम
    लेकर ही हम जागते है और तुम्हारे नाम का आशीर्वाद चाहते है।
    तुम्हारी ही हम गाथा गाते है।
    हे भारत के भाग्य विधाता (सुपर हीरो )
    तुम्हारी जय हो जय हो जय हो। ”
    जोर्ज पंचम भारत आया 1911 में और उसके स्वागत में ये गीत गाया गया।
    जब वो इंग्लैंड चला गया तो उसने उस जन गण मन का अंग्रेजी में अनुवाद करवाया।
    जब अंग्रेजी अनुवाद उसने सुना तो वह बोला कि इतना सम्मान और
    इतनी खुशामद तो मेरी आज तक इंग्लॅण्ड में भी किसी ने नहीं की। वह बहुत खुश हुआ।
    उसने आदेश दिया कि जिसने भी ये गीत उसके (जोर्ज पंचम के) लिए लिखा है
    उसे इंग्लैंड बुलाया जाये। रविन्द्र नाथ टैगोर इंग्लैंड गए।
    जोर्ज पंचम उस समय नोबल पुरस्कार समिति का अध्यक्ष भी था।
    उसने रविन्द्र नाथ टैगोर को नोबल पुरस्कार से सम्मानित करने का फैसला किया तो
    रविन्द्र नाथ टैगोर ने कहा की आप मुझे नोबल पुरस्कार देना ही चाहते हैं
    तो मैंने एक गीतांजलि नामक रचना लिखी है उस पर मुझे दे दो
    लेकिन इस गीत के नाम पर मत दो और यही प्रचारित किया जाये
    क़ि मुझे जो नोबेल पुरस्कार दिया गया है वो गीतांजलि नामक रचना के ऊपर दिया गया है।
    जोर्ज पंचम मान गया और रविन्द्र नाथ टैगोर को सन 1913
    में गीतांजलि नामक रचना के ऊपर नोबल पुरस्कार दिया गया।
    रविन्द्र नाथ टैगोर की ये सहानुभूति ख़त्म हुई 1919 में
    जब जलिया वाला कांड हुआ और टैगोर ने विरोध किया और नोबल पुरस्कार
    अंग्रेजी हुकूमत को लौटा दिया।
    सन 1919 से पहले जितना कुछ भी रविन्द्र नाथ टैगोर ने लिखा वो अंग्रेजी सरकार के
    पक्ष में था और 1919 के बाद उनके लेख कुछ कुछ अंग्रेजो के खिलाफ होने लगे थे।
    रविन्द्र नाथ टेगोर के बहनोई, सुरेन्द्र नाथ बनर्जी लन्दन में रहते थे और ICS ऑफिसर थे।
    अपने बहनोई को उन्होंने एक पत्र लिखा था (ये 1919 के बाद की
    घटना है) । इसमें उन्होंने लिखा है कि ये गीत ‘जन गण मन’ अंग्रेजो के द्वारा मुझ पर
    दबाव डलवाकर लिखवाया गया है।
    इसके शब्दों का अर्थ अच्छा नहीं है।
    इस गीत को नहीं गाया जाये तो अच्छा है। लेकिन अंत में उन्होंने लिख दिया कि इस
    चिठ्ठी को किसी को नहीं दिखाए क्योंकि मैं इसे सिर्फ आप तक
    सीमित रखना चाहता हूँ लेकिन जब कभी मेरी म्रत्यु हो जाये
    तो सबको बता दे। 7 अगस्त 1941 को
    रबिन्द्र नाथ टैगोर की मृत्यु के बाद इस पत्र को
    सुरेन्द्र नाथ बनर्जी ने ये पत्र सार्वजनिक किया, और सारे देश को ये कहा क़ि ये जन गन मन
    गीत न गाया जाये।
    जब भारत सन 1947 में स्वतंत्र हो गया तो
    जवाहर लाल नेहरु ने इसमें राजनीति कर डाली। संविधान सभा की बहस चली।
    संविधान सभा के 319 में से 318 सांसद ऐसे थे
    जिन्होंने बंकिम बाबु द्वारा लिखित वन्देमातरम को राष्ट्र गान स्वीकार करने पर सहमति जताई।
    बस एक सांसद ने इस प्रस्ताव को नहीं माना।
    और उस एक सांसद का नाम था पंडित जवाहर लाल नेहरु।
    उनका तर्क था कि वन्दे मातरम गीत से मुसलमानों के दिल को चोट पहुचती है
    इसलिए इसे नहीं गाना चाहिए
    नेहरु जी ने इस मुद्दे को गाँधी जी की मृत्यु तक टाले रखा और
    उनकी मृत्यु के बाद नेहरु जी ने जन गण मन को राष्ट्र गान घोषित कर दिया
    और जबरदस्ती भारतीयों पर इसे थोप दिया गया
    तो ये इतिहास है वन्दे मातरम का और जन गण मन का।
    अब ये आप को तय करना है कि आपको क्या गाना है ?
    इतने लम्बे पत्र को आपने धैर्यपूर्वक पढ़ा इसके लिए आपका धन्यवाद्।
    आप अगर और भारतीय भाषाएँ जानते हों तो इसे उस भाषा में अनुवादित कीजिये, अंग्रेजी छोड़ कर।
    जय हिंद |
    वन्दे मातरम।

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    1. मनीष दीक्षित जी आप अंग्रैज हो क्या अपना वंशावली बताये,राष्ट्रगान की व्याख्या अंग्रेजो से जोड़ने का मतलब क्या है जो मन - तन में बस चुका है,भारत का विवेचना करता हो। उसका दूसरे से जोड़कर देखने का मतलब,आप पश्चमि विचारधारा के ज्ञानी मालूम पड़ते हो जो अपने को ही क्षेष्ठ समक्षते हैं।

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  28. जो भी लोग यहाँ जॉर्ज पंचम का संदर्भ ला कर ज्ञान बाँटने की कृपा कर रहे हैं उनसे निवेदन है कि वे अपने ये भोथरे तर्क ले कर यहाँ से प्रस्थान करें। हर बात पर बहस करने और सुझाव देने लगने की हठी भारतीय मानसिकता इतनी पूर्वाग्रह ग्रसित है कि जैसे मरीज से मिलने जाने पर अपने को हर कोई डॉक्टर समझ कर इलाज बताने लगता है।
    जॉर्ज पंचम के लिए इसे लिखा गया वाला तर्क लेकर जो यहाँ आ रहे हैं उन्होंने शायद रवीन्द्र के काल में हुए इस पूरे विमर्श का क ख ग तक नहीं बाँचा, पढ़ा या देखा। स्वयं रवीन्द्र ने उन सब आरोपों के उत्तर अपने समय में ही लिख दिए थे और इस विवाद का निराकरण कर दिया था। इसलिए उस सारे विमर्श को पढ़े बिना मजिस्ट्रेट बनने की कोशिश तो करिए मत। न ही फिर से उस विवाद के बारे में जरा सा जान कर उसे पुनर्जीवित करने की साजिश करें। यह तो थी पहली बात ।
    अब दूसरी बात यह कि यदि राष्ट्र के प्रति आपके मन में जरा-सी भी श्रद्धा होती तो राष्ट्रगान पर तर्क वितर्क नहीं करते। राष्ट्रगान जब निर्धारित होना था, हो चुका । अब यदि रत्ती-भर भी मर्यादा आप लोगों में शेष है तो अपने राष्ट्रगान का सम्मान करना सीखेँ, न कि उसे विवादों में धकेलना और उस पर आपत्तियाँ करना ।

    भले ही कोई भी क्यों न हो, कितना भी विद्वान या शक्तिशाली क्यों न हो, कोई भी यह अधिकार नहीं रखता कि देश के राष्ट्रगान पर आपत्ति करे या उसे विवादों में धकेले और आने वाली पीढ़ियों के मन से राष्ट्रगान के प्रति आस्था कम करे। यह वैसा ही मामला है मानो कोई अपनी माँ के सुंदर-असुंदर या शिक्षित-अशिक्षित होने को आधार बना कर उसका आदर करना है या नहीं करना आदि तय करता है।

    असल में तो माँ भले ही असुंदर है, भले ही अपढ़ या मूर्ख है, वह जैसी भी है उसका पूरा सम्मान किया जाना चाहिए। इतनी-सी आधारभूत बात जिन लोगों को नहीं पता वे ऊँचे -ऊँचे, लंबे लंबे तर्क मातृत्व को लेकर करते जिस प्रकार शोभा नहीं देते, बल्कि अपनी नीचता ही दिखाते हैं उसी प्रकार यहाँ अपना ज्ञान बघारने आए हुए राष्ट्रगान को नीचा दिखाने वाले लोग अपनी ही नीचता दिखा रहे हैं। राष्ट्रगान के नाम पर यदि एक निरर्थक धुन भी तय कर दी जाती तो उसका भी सम्मान किया जाना चाहिए होता है। इतनी मूलभूत समझ जिनमें नहीं है, वे अपने विवादों का टोकरा लेकर यहाँ से चले जाएँ, अपना ज्ञान मुफ्त में न बाँटें। मुझे उसकी आवश्यकता नहीं है। अपने पास सम्हाल कर रखें और अपनी नकली देशभक्ति का ढोंग करना बंद करें।
    इसके बाद विवाद खड़ा करने वाली टिप्पणियों को डिलीट कर दिया जाएगा ।

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    1. sab pehle ye bataye ke shri Manish Dixit ji ne Rashtria Gaan ka jo hindi anuvaad kiya hai woh sahi hai? Aur agar sahi hai toh hum ab bhi un angrejo ka sammaan kyu karein woh bhi hamare rashtriya gaan mein....

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    2. miss maine aapka pura sarans padha aur dixit ji ka bhe kya dixit ji ne jo meaning bataya wo sahi nahi hai too aap hi sahi meaning bta dijiye

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  29. agar meri kahin baatein mulya waan lagi ho to unka utar dekar unko bahumulya banain....!!

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  30. This comment has been removed by the author.

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  31. What did Rabindra Nath Tagore said on this matter?

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    1. इस गीत पर विवाद इसकी प्रथम प्रस्तुति (1911 में) पर ही उठ खड़ा हुआ था। उस विवाद का उत्तर देते हुए कवि (रवीन्द्रनाथ ठाकुर) ने इस विवाद का उत्तर देते हुए 1939 को लिखे अपने एक पत्र में लिखा था -
      "I should only insult myself if I cared to answer those who consider me capable of such unbounded stupidity."
      फिर उन्होंने लिखा - "A certain high official in His Majesty's service, who was also my friend, had requested that I write a song of felicitation towards the Emperor. The request simply amazed me. It caused a great stir in my heart. In response to that great mental turmoil, I pronounced the victory in Jana Gana Mana of that Bhagya Vidhata (ed. God of Destiny) of India who has from age after age held steadfast the reins of India's chariot through rise and fall, through the straight path and the curved. That Lord of Destiny, that Reader of the Collective Mind of India, that Perennial Guide, could never be George V, George VI, or any other George. Even my official friend understood this about the song. After all, even if his admiration for the crown was excessive, he was not lacking in simple common sense."

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    2. mahodaya,
      mai ek samanya nagrik hu aur bas itna janna chahti hu ki gr ye sach hai ki, ye geet angrejo ke samman me Tagore ji ne, angrejo ke dabav me aakar gaya tha (mujhe nahi pata ki ye sach hai ya nahi) to kya unke jaane ke baad agar humne iss geet ko Rashtra Gaan bana diya to unki aatma ko bi isse khushi milti hogi??? Unhne to iss geet ko rashtra geet nahi banaya tha na??? ye banane wale bi to desh ke nagrik hi the... mai apne rashta gan ka bahut samman karti hu,, bachpan se gaate aa rahe hain but aaj iske baare me kuch aapati janak baatein net par padhi, mujhe bi bahut dukh hai iss baat ka... aapse request hai ki aap iska sahi arth hamein batayein.... taki ye duvidha hamare man se chali jaye...

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  32. I just gone through with all the research here and comments and reply,
    guys I want to tell you all one thing in simple language with common example.

    lets take a song " ek Ladki ko dekha to aisa laga jaise Khilta gulab....." very beautiful song , in movie its sang to praise Manisha koirala, but if some one sing this for his love one does that mean this man is praising the Manisha koirala or it simply indicate the love of this man to his love in front of him.

    Now, what I am trying to say is, Rabindra Nath tagore was Poet so its just a song to Honor.
    in 1911 its first time sang in congress meeting where King George V was chef guest, fine take it as his honor.

    but after independence its first stanza chosen as best to describe pride of our nation, as a Honor song, here its giving honor to "People of NATION", so from that day its declared as National Anthem and its for the honor of our Nation India Bharat.

    same as the song is not always for Manisha koirala. its for her only one time and that is in shooting of song, its not at the time of composition nor at the time of singing and not even when some one sing it for some one.


    I hope you all understand it and finish this discussion because its no more topic of debate.

    Jai Hind
    inder_sardar@yahoo.com

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  33. This comment has been removed by the author.

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  34. Michael Pawan to डॉ.कविता वाचक्नवी Dr.Kavita Vachaknavee

    Let's b free of comments @ George.....
    Bcoz " Bhensh k aage bin bajaana " aka ka kaam nhi...
    And if
    there is lotus, mud is seen...
    B frank n nice....with your great thoughts.
    Thanks

    Michael Pawan

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  35. Michael Pawan to डॉ.कविता वाचक्नवी Dr.Kavita Vachaknavee

    Let's b free of comments @ George.....
    Bcoz " Bhensh k aage bin bajaana " aka ka kaam nhi...
    And if
    there is lotus, mud is seen...
    B frank n nice....with your great thoughts.
    Thanks

    Michael Pawan

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  36. All above discussion make us more confused.
    Though l love Jan gan man,admire its tune.
    I feel great when this is sung in chorus after the flag hoisting.l always sing it as praising to our National flag...The tricoloured sacred flag is "Bharatvasi's bhagya Vidhata.' Long live tricoloured......3 times.

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  37. All above discussion make us more confused.
    Though l love Jan gan man,admire its tune.
    I feel great when this is sung in chorus after the flag hoisting.l always sing it as praising to our National flag...The tricoloured sacred flag is "Bharatvasi's bhagya Vidhata.' Long live tricoloured......3 times.

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    1. Always think that we all sing this song for our indian citizens

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  38. Rastra geet ke uper di gyee tark manish dixit dwara theek pratit hota hai

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आपकी सार्थक प्रतिक्रिया मूल्यवान् है। ऐसी सार्थक प्रतिक्रियाएँ लक्ष्य की पूर्णता में तो सहभागी होंगी ही,लेखकों को बल भी प्रदान करेंगी।। आभार!

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